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खालिस्तानी उग्रवादी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

इतने दिनों की चुप्पी के बाद कनाडा की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट

एजेंसियां

ओटावाः कनाडा की खुफिया एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर खालिस्तानी उग्रवादियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर दिया है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह समूह कनाडा के भीतर अपने हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न संस्थानों का दुरुपयोग कर रहा है। कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा की वर्ष 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि कनाडा स्थित खालिस्तानी उग्रवादियों की हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता कनाडा और कनाडाई हितों के लिए एक निरंतर खतरा बनी हुई है।

शुक्रवार (1 मई, 2026) को कनाडा सरकार की वेबसाइट पर जारी इस विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ उग्रवादी कनाडा के नागरिकों के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। ये लोग कनाडाई संस्थानों का लाभ उठाकर अपने हिंसक एजेंडे का प्रचार करते हैं और समुदाय के अनजान सदस्यों से धन एकत्र करते हैं, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ दिया जाता है। खालिस्तानी उग्रवादी समूह भारत के भीतर एक संप्रभु राज्य के निर्माण की मांग करते हैं। अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होने के कारण नई दिल्ली ने इन समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है।

यह रिपोर्ट एयर इंडिया फ्लाइट 182 की बमबारी की 40वीं वर्षगांठ के एक साल बाद आई है। उस घातक हमले के संदिग्ध इसी उग्रवादी समूह के सदस्य थे। रिपोर्ट में याद दिलाया गया है कि 329 लोगों की जान लेने वाला वह हमला आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बना हुआ है, जिसमें मारे गए अधिकांश लोग कनाडाई नागरिक थे।

हालांकि, रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया गया है; इसमें कहा गया है कि खालिस्तान राज्य के निर्माण के लिए गैर-हिंसक वकालत को उग्रवाद नहीं माना जाता है। कुछ कनाडाई नागरिक इस अलगाववादी आंदोलन के समर्थन में वैध और शांतिपूर्ण अभियानों में भाग लेते हैं। खुफिया एजेंसी के अनुसार, केवल उन व्यक्तियों के छोटे समूह को खालिस्तानी उग्रवादी माना जाता है जो मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने या योजना बनाने के लिए कनाडा को आधार के रूप में उपयोग करते हैं।

भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साल 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय संलिप्तता के आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। भारत ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। पिछले साल कार्यभार संभालने वाले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में अब दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। कनाडा की इस नई सुरक्षा रिपोर्ट को भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्वीकार करने और आतंकवाद के खिलाफ एक साझा रुख अपनाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।