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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्धविराम संकट में

चंद दिनों की शांति के बाद फिर से माहौल हुआ अशांत

एजेंसियां

काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने एक-दूसरे पर नए सिरे से सीमा पार हमले करने के आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से ही नाजुक शांति वार्ता पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सोमवार को अफगानिस्तान के तालिबान अधिकारियों ने दावा किया कि पूर्वी कुनार प्रांत में हुए हमलों में चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने दक्षिण वज़ीरिस्तान में सीमा पार से हुई गोलीबारी में कम से कम तीन नागरिकों के घायल होने की सूचना दी है।

तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार और रॉकेट हमले किए हैं, जिसमें 45 लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद में स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी विश्वविद्यालय और कई रिहायशी मकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें छात्र, महिलाएं और बच्चे घायल हुए हैं। प्रवक्ता ने इसे अक्षम्य युद्ध अपराध करार दिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को सरासर झूठ बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय पर कोई हमला नहीं किया गया है।

वहीं, पाकिस्तानी सीमा बलों के प्रवक्ता ने दक्षिण वज़ीरिस्तान की घटना को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक की सबसे गंभीर झड़प बताया है। चीन की मध्यस्थता में पिछले महीने हुए समझौते के बाद यह पहली बड़ी हिंसक घटना है।

मार्च में हुए इस युद्धविराम का उद्देश्य हफ्तों से जारी घातक हिंसा को रोकना था। तुर्की, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश भी इस संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास कर रहे हैं। 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं।

सुरक्षा के मुद्दे इन संबंधों में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। पाकिस्तान की प्रमुख मांग है कि अफगानिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले तहसीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे सशस्त्र समूहों पर नकेल कसे, जो नियमित रूप से पाकिस्तानी क्षेत्रों में घातक हमले करते हैं। इन ताज़ा झड़पों ने न केवल कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।