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आर्मेनिया की शीर्ष अदालत का चुनाव खारिज करने से इंकार

रूस समर्थक विपक्ष की याचिका को खारिज किया गया

एजेंसियां

येरेवान: आर्मेनिया में हाल ही में संपन्न हुए विवादित विधायी चुनावों के बाद राजनीतिक संकट उस समय और गहरा गया, जब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, संवैधानिक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने शनिवार को देश के रूस-समर्थक विपक्ष द्वारा दायर उस हाई-प्रोफाइल याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें जून में आयोजित संसदीय चुनावों के नतीजों को पूरी तरह अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी।

आर्मेनिया की आधिकारिक सरकारी समाचार एजेंसी आर्मेनप्रेस की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, संवैधानिक न्यायालय ने अपनी सुनवाई पूरी करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए अंतिम परिणामों को पूरी तरह कानूनी और वैध करार दिया है। अदालत के इस फैसले से पश्चिम-समर्थक रुझान वाले वर्तमान प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान की सत्ताधारी सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी को बड़ी राहत मिली है, जिसने इस बेहद प्रतिस्पर्धी चुनाव में पुनः बहुमत हासिल कर अपनी सरकार की वापसी सुनिश्चित की थी।

न्यायालय ने मुख्य रूप से स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया नामक मुख्य विपक्षी गठबंधन की उस अपील को नामंजूर किया, जिसने चुनाव प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। आधिकारिक डेटा के मुताबिक, इस रूस-समर्थक विपक्षी गुट को आम चुनाव में मात्र 23.3 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। शिकस्त मिलने के बाद, विपक्ष ने देशव्यापी स्तर पर मतदान में व्यापक प्रशासनिक हेरफेर, मतपेटियों में धांधली और तकनीकी गड़बड़ियों के संगीन आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री पाशिन्यान के नेतृत्व वाली सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी ने अकेले ही लगभग 50 फीसदी मतों पर कब्जा जमाकर संसद में अपनी मजबूत स्थिति को साबित किया था।

चुनावी प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट साफ देखी गई। स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया सहित अन्य छोटे विपक्षी समूहों ने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। विपक्ष का दावा था कि मतदान की तारीख से ठीक पहले उनके कई प्रमुख संसदीय उम्मीदवारों, रणनीतिकारों और सक्रिय समर्थकों को निशाना बनाकर राजनीतिक द्वेष के तहत गिरफ्तारियां की गईं, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहे अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों के स्वतंत्र समूह ने अपनी रिपोर्ट में एक संतुलित पक्ष रखा। पर्यवेक्षकों ने स्थानीय स्तर पर वोट खरीदने (कैश-फॉर-वोट) और कुछ चुनावी उल्लंघनों के दावों को अपनी केस डायरी में दर्ज जरूर किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इन छिटपुट घटनाओं से अंतिम परिणाम प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने प्रमाणित किया कि देश के अधिकांश मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच वोटिंग पूरी तरह सुचारू, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी। अदालत के इस अंतिम फैसले के बाद अब आर्मेनिया में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।