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एक ईडी छापा और वाशिंग मशीन में अशोक मित्तल

लवली स्वीट्स से लेकर संसद तक का सफरनामा

  • यूनिवर्सिटी को लेकर पड़ा था छापा

  • आप ने राज्यसभा का नेता बनाया था

  • विपक्ष ने कहा दबाव में दलबदल किया

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया जब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल ने अपनी पुरानी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 62 वर्षीय मित्तल का यह फैसला न केवल पंजाब, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसके पीछे की टाइमिंग और हालिया घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अशोक मित्तल का भाजपा में शामिल होना कई मायनों में चौंकाने वाला है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रवर्तन निदेशालय ने महज 10 दिन पहले ही उनके विभिन्न परिसरों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा, अभी कुछ ही हफ्ते बीते हैं जब आम आदमी पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें उच्च सदन (राज्यसभा) में राघव चड्ढा की जगह उप-नेता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद इस तरह का दलबदल आप के लिए एक बड़े संगठनात्मक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

अशोक मित्तल की जीवन यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। जालंधर छावनी में एक पारंपरिक व्यवसायी परिवार में जन्मे मित्तल का पालन-पोषण लवली स्वीट्स के इर्द-गिर्द हुआ, जिसकी नींव उनके पिता स्वर्गीय बलदेव राज मित्तल ने रखी थी। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने अपने भाइयों नरेश और रमेश मित्तल के साथ मिलकर पारिवारिक मिठाई व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। हालांकि, उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और देश के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की।

2022 में जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा, तब उन्हें पंजाब के एक प्रतिष्ठित और शिक्षित चेहरे के रूप में पेश किया गया था। अब उनके भाजपा में शामिल होने पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के कारण उन्हें पाला बदलने पर मजबूर किया गया है। दूसरी ओर, भाजपा ने मित्तल का स्वागत करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और देश के विकास मॉडल में उनके बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया है। पंजाब में आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच, मित्तल का यह कदम राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।