म्यांमार में दिखावे वाले चुनाव का असली मकसद उजागर
एजेंसियां
बैंकॉक: म्यांमार के सैन्य कमांडर मिन आंग ह्लाइंग, जिन्होंने 2021 में आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी, ने शुक्रवार को देश के निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। हालांकि, उनकी इस जीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों ने हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दिखावा करार दिया है। इन चुनावों में सू ची की लोकप्रिय पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी सहित कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने हिस्सा नहीं लिया था।
मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति बनने को सेना द्वारा नागरिक शासन के मुखौटे के पीछे अपनी सत्ता को बरकरार रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 69 वर्षीय ह्लाइंग का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा। उनके मंत्रिमंडल में भी सेना का वर्चस्व साफ दिखाई दे रहा है; 30 नए कैबिनेट सदस्यों में से 28 या तो वर्तमान/पूर्व जनरल हैं या सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी के सदस्य हैं। वर्तमान विधायिका में भी सेना समर्थक गुट के पास लगभग 90 फीसद सीटें हैं।
शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में ह्लाइंग ने दावा किया कि म्यांमार लोकतंत्र की राह पर लौट आया है, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में जारी गृहयुद्ध को समाप्त करना है। यह गृहयुद्ध 2021 में तख्तापलट के बाद शुरू हुए सशस्त्र प्रतिरोध का परिणाम है। उन्होंने विद्रोही जातीय समूहों के साथ शांति स्थापित करने और आसियान देशों के साथ संबंधों को सुधारने का भी संकल्प लिया।
चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये चुनाव देश के मात्र 42 फीसद हिस्से में ही आयोजित किए जा सके, क्योंकि शेष हिस्सों में भीषण गृहयुद्ध जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी ढांचे और राजनीतिक दलों के चयन को इस तरह तैयार किया गया था कि सेना समर्थित पार्टी की जीत पहले से तय थी। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले ह्लाइंग ने सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया है, क्योंकि म्यांमार का संविधान राष्ट्रपति को एक साथ सैन्य पद संभालने की अनुमति नहीं देता। अब उनके करीबी जनरल ये विन ओ ने सेना की कमान संभाली है।