Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM Modi on Congress: कांग्रेस की खतरनाक चाल! पश्चिम एशिया के देशों से भारत के रिश्ते बिगाड़ना चाहती ... National Security: 'सरकारी इमारतों में अब भी चीनी CCTV क्यों?' बैन के बाद राहुल गांधी का केंद्र से त... Assam Election: असम चुनाव का 'यूपी कनेक्शन'! यूपी से रिवर्स माइग्रेशन शुरू, झुग्गियों में पसरा सन्ना... Rajasthan Health System: एंबुलेंस नहीं मिली तो साइकिल बनी सहारा! डीग में बुजुर्ग की मजबूरी देख पसीजा... Delhi Crime: दिल्ली में फैक्ट्री के बाहर लावारिस बैग में मिली सड़ी-गली लाश! इलाके में फैला हड़कंप Bihar Tourism: अजगैवीनाथ धाम में बनेगा बिहार का एक और ग्लास ब्रिज! 20 करोड़ की लागत से सुल्तानगंज की... Rajasthan SI Recruitment: राजस्थान में 859 सब इंस्पेक्टरों से छिनेगी खाकी! हाई कोर्ट ने रद्द की SI भ... Greater Noida Petrol Pump: पेट्रोल की जगह भरा 'पानी'! ग्रेटर नोएडा में 20 गाड़ियां रास्ते में हुईं बं... Delhi News: दिल्ली में LPG की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन! 22 ठिकानों पर रेड, कई पर FIR दर्ज कानपुर में तेज आंधी-तूफान का तांडव! ऑटो पर गिरा बरगद का पेड़, 2 की मौत

सीसीटीवी और एप्स के जरिए विदेशी जासूसीः राहुल गांधी

सरकार अब भी जनता से असली खतरा छिपा रही है

  • संसद में सरकार ने जबाव नहीं दिया

  • विदेशी ए आई भी डेटा हासिल कर रहे

  • सरकार का उत्तर असंतोषजनक ही रहा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार चीनी सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले विदेशी निगरानी के खतरों को छिपा रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे देश के नागरिकों की सुरक्षा के साथ समझौता हो सकता है।

फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को ढकने और लोगों को अंधेरे में रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे भारत को अनभिज्ञ रखने की एक जानबूझकर की गई साजिश करार दिया। गांधी का दावा है कि सार्वजनिक उपयोग में चीनी सीसीटीवी कैमरों पर प्रतिबंध के बावजूद, ऐसे उपकरण अभी भी सरकारी इमारतों के भीतर लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, प्रतिबंधित चीनी ऐप्स बदले हुए नामों के साथ फिर से सामने आ रहे हैं। विदेशी एआई प्लेटफॉर्म संवेदनशील डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं और सरकार के पास इस पर कहने के लिए कुछ भी नहीं है।

राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय का जवाब अधूरा था और उसमें मुख्य चिंताओं पर कोई विशिष्ट जानकारी नहीं दी गई।

गांधी ने पूछा, हमारे कैमरे किन देशों से आए हैं? सुरक्षा के दृष्टिकोण से कितने कैमरे प्रमाणित हैं? कौन से विदेशी एआई प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा का उपयोग कर रहे हैं? उनके अनुसार, मंत्रालय के जवाब में न तो कोई आंकड़े थे और न ही किसी एक प्लेटफॉर्म का नाम दिया गया था। उन्होंने कहा कि लगभग 10 लाख चीनी कैमरों से जुड़े जोखिमों को पहले स्वीकार करने के बावजूद, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मौजूदा सिस्टम सुरक्षित हैं या नहीं।

राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार साइबर सुरक्षा जोखिमों के प्रति सचेत है और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित करना, कानूनी ढांचे को मजबूत करना और सीसीटीवी सिस्टम के मानकों को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

प्रसाद ने 2021 के नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टिव ऑन ट्रस्टेड सोर्सेज का हवाला दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दूरसंचार उपकरण विश्वसनीय विक्रेताओं से ही लिए जाएं। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए दूरसंचार अधिनियम 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2022 का भी उल्लेख किया।

राहुल गांधी ने अंत में कहा कि विस्तृत जानकारी न देना पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाता है। विदेशी निगरानी की वास्तविकता को छिपाकर सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। यह मुद्दा डेटा सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रणालियों में विदेशी तकनीक के उपयोग पर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज करता है।