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भारतीय नौसेना के बेड़े में आईएनएस अरिदमन शामिल

तीसरी परमाणु पनडुब्बी का जलावरण संपन्न

राष्ट्रीय खबर

विशाखापत्तनम: भारत ने अपनी रणनीतिक सैन्य क्षमता में एक और मील का पत्थर स्थापित करते हुए अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, आईएनएस अरिदमन को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया है। शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में विशाखापत्तनम में आयोजित एक संक्षिप्त और गोपनीय समारोह में इसे कमीशन किया गया।

अरिहंत श्रेणी की यह तीसरी पनडुब्बी भारत के रणनीतिक हथियार कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत की परमाणु तिकड़ी को और अधिक सुदृढ़ बनाती है, जिसका अर्थ है कि भारत अब जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों से परमाणु हमला करने की अपनी क्षमता को और अधिक मारक बना चुका है।

हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस कमीशनिंग को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक सांकेतिक संदेश के जरिए इसकी पुष्टि की। उन्होंने लिखा: यह शब्द नहीं बल्कि शक्ति है, अरिदमन! आईएनएस अरिदमन अपने पूर्ववर्ती जहाजों, आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात (जो अगस्त 2024 में कमीशन हुई थी) की तुलना में आकार और मारक क्षमता में कहीं अधिक उन्नत है।

जहां पहली दो पनडुब्बियां लगभग 6,000 टन की थीं, वहीं अरिदमन लगभग 7,000 टन की विशाल पनडुब्बी है। यह पनडुब्बी 24 के-15 सागरिका मिसाइलें या 8 के-4  मिसाइलें ले जाने में सक्षम है। के-4 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है, जो इसे दुश्मन के लिए एक अदृश्य और घातक खतरा बनाती है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विशाखापत्तनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल प्रोजेक्ट के तहत पूरा किया गया है। भारत अब उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस) की कतार में मजबूती से खड़ा है जिनके पास अपनी परमाणु पनडुब्बियां बनाने की क्षमता है। नौसेना के सूत्रों के अनुसार, इस श्रेणी की अगली पनडुब्बी भी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों से गुजर रही है और उसे अरिसूदन नाम दिया जा सकता है। इसके अलावा, भारत की योजना 2036-39 तक स्वदेशी परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियां बनाने की भी है।