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Aniruddhacharya Case: सोशल मीडिया से हटाने होंगे अनिरुद्धाचार्य के ‘फर्जी’ वीडियो, दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, जिन्हें पूकी बाबा के नाम से भी जाना जाता है, उनके व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य के नाम, आवाज और छवि का अनधिकृत उपयोग करके मीम्स, वीडियो या किसी भी अन्य सामग्री, जिसमें एआई या डीपफेक सामग्री शामिल है बनाने पर रोक लगा दी है.

30 मार्च को जस्टिस तुषार राव गेडेला ने अनिरुद्धाचार्य द्वारा दायर एक मुकदमे के जवाब में यह आदेश सुनाया, जिसमें बिना अनुमति उनके नाम, आवाज और छवि के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई. कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta, X और Google को भी निर्देश दिया है कि वो वादी द्वारा पहचाने गए उन कंटेंट को हटा दें जिनमें गैरकानूनी रूप से उनके व्यक्तित्व का उपयोग या अनुकरण किया गया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कोर्ट का निर्देश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनधिकृत रूप से अनिरुद्धाचार्य की पहचान का उपयोग कर बनाए गए मीम्स, वीडियो या किसी भी प्रकार के कंटेंट चाहे वह AI या डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया हो कानूनी उल्लंघन माना जाएगा. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि Meta, X और Google जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे सभी आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाएं.

‘यह मामला सिर्फ पैरोडी का नहीं…’

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक प्रसिद्ध और व्यापक रूप से स्वीकृत सार्वजनिक हस्ती हैं. जिनका व्यक्तित्व, प्रतिष्ठा और सद्भावना दशकों के आध्यात्मिक उपदेशों के माध्यम से बनी है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ पैरोडी का नहीं है, बल्कि इससे अनिरुद्धाचार्य की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है.

कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के नाम, आवाज, छवि या हाव-भाव का बिना अनुमति इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर तुरंत राहत नहीं देने से अपूरणीय क्षति होगी जिसकी भरपाई आर्थिक रूप से नहीं की जा सकती. यानी नुकसान हो की भरपाई पैसों से संभव नहीं होगी.

अनिरुद्धाचार्य का आरोप

दरअसल कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कई संस्थाएं बिना अनुमति, लाइसेंस या सहमति के उनकी शख्सियत का दुरुपयोग कर रही हैं, जिसका मकसद अवैध व्यावसायिक लाभ कमाना और उनकी साख, व्यावसायिक मूल्य और प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाना है. न्होंने यह भी कहा कि कुछ भ्रामक और मनगढ़ंत सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे यह झूठा दावा किया जा रहा है कि वो धोखाधड़ी वाली योजनाओं का समर्थन करते हैं या उनसे जुड़े हुए हैं.