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सितंबर में भारत आ सकते हैं ब्लादिमीर पुतिन

रूस के विदेश मंत्री रुडेंको आंद्रेई यूरेविच ने जानकारी दी

  • कोलंबो के सम्मेलन में किया एलान

  • ब्रिक्स का सम्मेलन दिल्ली में होना है

  • संगठन के अंदर मतभेदों को दूर करना है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस वर्ष सितंबर में भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की प्रबल संभावना है। कोलंबो में 1 अप्रैल, 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान रूसी उप विदेश मंत्री रुडेंको आंद्रेई यूरेविच ने इस विषय पर आधिकारिक संकेत दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मॉस्को, नई दिल्ली द्वारा ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने और संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करता है।

यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण पुतिन की विदेश यात्राएं सीमित रही हैं। रुडेंको ने कहा, हमारे राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली आने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में हमें ऐसी कोई बाधा दिखाई नहीं देती जो उन्हें इस सम्मेलन में हिस्सा लेने से रोक सके।

हालांकि, उन्होंने पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का हवाला देते हुए यह भी जोड़ा कि शिखर सम्मेलन के समय की परिस्थितियों पर अंतिम निर्णय निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल इस निमंत्रण को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है।

कूटनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ रूस ने ऊर्जा बाजार में अपनी भूमिका को लेकर भी स्थिति साफ की है। हाल ही में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण रूस द्वारा 1 अप्रैल, 2026 से गैसोलीन (पेट्रोल) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया है। इसके बावजूद, रुडेंको ने भारत और अन्य साझीदारों को आश्वस्त किया कि रूस तेल आपूर्ति से जुड़े अपने सभी मौजूदा अनुबंधों का पूरी तरह सम्मान करेगा और वैश्विक ऊर्जा संकट के समय में अपने सहयोगियों को अकेला नहीं छोड़ेगा।

रुडेंको की यह कोलंबो यात्रा रूसी ऊर्जा उप मंत्री रोमन मार्शविन के श्रीलंका दौरे के ठीक एक सप्ताह बाद हुई है। यह दर्शाता है कि रूस दक्षिण एशिया में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। कोलंबो स्थित थिंक टैंक पाथफाइंडर फाउंडेशन के मंच से रुडेंको ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत सदस्य देशों के आपसी मतभेदों को सुलझाने और संगठन को एकजुट करने में सराहनीय भूमिका निभा रहा है। यह शिखर सम्मेलन न केवल भारत की वैश्विक साख को मजबूती देगा, बल्कि रूस-भारत के समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंधों को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।