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सुप्रीम कोर्ट ने पच्चीस हजार जुर्माना लगाया

अब मुकदमेबाजी का उल्टा असर केंद्र सरकार पर पड़ा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की मुकदमेबाजी की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को केंद्र पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने एक सीआईएसएफ (CISF) कांस्टेबल को सेवा से हटाए जाने के खिलाफ दायर केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। न्यायालय ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सरकार उन मामलों को भी शीर्ष अदालत तक खींच लाती है जिनमें उच्च न्यायालय पहले ही मानवीय और कानूनी आधार पर राहत दे चुका होता है।

यह पूरा मामला सीआईएसएफ के एक कांस्टेबल से जुड़ा है, जिसे 11 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति और कथित कदाचार के आरोप में 10 साल की सेवा के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। उस पर दूसरा आरोप यह था कि उसने अपने छोटे भाई के साथ एक अन्य सीआईएसएफ कर्मी की बेटी की शादी (जो घर से भागकर की गई थी) में मदद की थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस दंड को असमान मानते हुए कांस्टेबल को सेवा में बहाल करने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के इसी फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने केंद्र सरकार को आईना दिखाते हुए पूछा, अदालतों में लंबित मामलों का रोना रोया जाता है, लेकिन सबसे बड़ा मुकदमेबाज कौन है? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में कानूनी राय लेनी चाहिए कि यदि उच्च न्यायालय ने किसी सजा को अनुचित मानकर रद्द कर दिया है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट तक नहीं लाना चाहिए। पीठ ने टिप्पणी की कि सरकार की इस जिद के कारण ही अदालतों पर बोझ बढ़ता है।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कांस्टेबल की स्थिति के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि वह एक पारिवारिक संकट (भागकर की गई शादी) से जूझ रहा था और उसे अपनी पारिवारिक स्थिति को सुधारने के लिए समय चाहिए था। जब केंद्र के वकील ने नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) के सिद्धांत पर अड़े रहकर पिछला वेतन न देने की दलील दी, तो अदालत ने नाराजगी में एसएलपी को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 11 दिन की अनुपस्थिति के लिए सेवा से बर्खास्तगी जैसा कठोर दंड पूरी तरह से गलत था। यह फैसला सरकार को एक कड़ा संदेश है कि वह तुच्छ मामलों में अदालती समय बर्बाद न करे।