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मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक

ऊर्जा संकट पर राष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार विमर्श जारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (1 अप्रैल, 2026) को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक संकट और भारत पर इसके संभावित प्रभावों की समीक्षा करना था। प्रधानमंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों का आकलन किया और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की ताकि आम नागरिक को युद्ध की विभीषणता और बढ़ती कीमतों से बचाया जा सके।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने प्रधानमंत्री को पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलपीजी और एलएनजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी। सरकार ने स्पष्ट किया कि यद्यपि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, लेकिन भारत ने अपने स्रोतों का विविधीकरण कर दिया है और अब नए देशों से एलपीजी का आयात शुरू किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें संकट से पहले के स्तर पर ही स्थिर रखी गई हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से आम आदमी की बुनियादी जरूरतों, जैसे बिजली की उपलब्धता और उर्वरकों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने खरीफ और रबी सीजन के लिए उर्वरकों के स्टॉक की समीक्षा की और निर्देश दिया कि किसानों को किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, पाइप वाली प्राकृतिक गैस कनेक्शनों के विस्तार की गति को भी बनाए रखने पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकों को इस संघर्ष के आर्थिक प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर दिया—सटीक और प्रामाणिक सूचनाओं का प्रवाह। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जनता के बीच गलतफहमी और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए समय-समय पर आधिकारिक जानकारी साझा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्थिति के कारण जिन क्षेत्रों या नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनकी सहायता के लिए विभाग तत्पर रहें। यह बैठक दर्शाती है कि सरकार पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल में भारत की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्क है।