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अदालत के निर्देश पर यह केस सीबीआई को सौंपा गया

दिल्ली का सबसे बड़ा 22.92 करोड़ रुपये का डिजिटल अरेस्ट मामला

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट के जरिए हुई अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी, जिसमें एक सेवानिवृत्त बैंकर ने अपनी जीवन भर की कमाई 22.92 करोड़ रुपये गंवा दी थी, अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, उच्चतम न्यायालय द्वारा दिसंबर 2025 में दिए गए निर्देशों के बाद इस मामले को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से सीबीआई को हस्तांतरित कर दिया गया है। सीबीआई की आर्थिक अपराध इकाई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए एक समर्पित टीम का गठन किया है।

यह मामला 78 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंकर नरेश मल्होत्रा से जुड़ा है, जो दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क में रहते हैं। अगस्त 2025 में जालसाजों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई पुलिस, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताकर उन्हें करीब छह सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट (वीडियो कॉल के जरिए निगरानी) में रखा था।

ठगों ने उन पर आरोप लगाया कि उनका आधार कार्ड और मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग, नशीले पदार्थों की तस्करी और पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। डर और दबाव में आकर मल्होत्रा ने 21 किस्तों में कुल ₹22.92 करोड़ विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए। जांच में पता चला कि इस राशि को आगे 4,236 से अधिक लेनदेन के जरिए सात अलग-अलग परतों में फैला दिया गया था ताकि इसे ट्रैक करना असंभव हो जाए।

उच्चतम न्यायालय ने देश भर में बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी वाले सभी मामलों की जांच अब सीबीआई करेगी। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि जालसाज शीर्ष अदालत के फर्जी आदेशों का उपयोग करके नागरिकों को आतंकित कर रहे हैं। इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो मुख्य रूप से म्यूल अकाउंट (पैसा घुमाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) के धारक और सुविधा प्रदाता थे।

सीबीआई अब इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के विदेशी संबंधों, विशेष रूप से कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में बैठे मुख्य ऑपरेटरों की जांच करेगी। जांच अधिकारियों का मानना है कि ठगों ने कॉल करने के लिए सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल किया था, जिससे एक साथ हजारों कॉल किए जा सकते हैं। इस मामले का सीबीआई को हस्तांतरण न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह भविष्य में ऐसे बड़े साइबर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।