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CG Assembly: विधानसभा की दर्शक दीर्घा में 140 आत्मसमर्पित नक्सली, समझा कानून बनाने का तरीका; महिला पूर्व नक्सलियों ने साझा किए अनुभव

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली लोकतंत्र के मंदिर यानी विधानसभा पहुंचे. जहां एक ओर सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या खत्म करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों ने अपनी नई जिंदगी और पुराने दर्द दोनों को खुलकर साझा किया.

140 आत्मसमर्पित नक्सली पहुंचे विधानसभा

रायपुर विधानसभा में कुल 140 आत्मसमर्पित नक्सली पहुंचे, जिनमें 54 महिलाएं भी शामिल थीं. इन सभी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और समझा कि सरकार किस तरह संचालित होती है. यह दौरा उनके लिए एक नए अनुभव की तरह रहा, जहां उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से जाना.

जंगल से जनजीवन तक महिलाओं ने सुनाई अपनी कहानी

बातचीत में आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने बताया कि पहले उनका जीवन जंगलों में भटकते हुए बीतता था, जहां कोई स्थायी ठिकाना नहीं था. लेकिन अब वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर परिवार के साथ रह रही हैं, सामान्य जीवन जी रही हैं और आम लोगों के बीच घुल-मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि यह बदलाव उनके लिए सुकून और संतोष लेकर आया है.

विधानसभा देखकर समझा लोकतंत्र का मतलब

कुछ महिलाओं ने बताया कि पहली बार विधानसभा की कार्यवाही को करीब से देखने का मौका मिला. यहां आकर उन्हें यह समझ में आया कि सरकार कैसे काम करती है और फैसले कैसे लिए जाते हैं. उनके लिए यह अनुभव नई सोच और समझ लेकर आया.

साथियों से अपील, हिंसा छोड़ मुख्यधारा में आएं

आत्मसमर्पित नक्सलियों ने अपने पुराने साथियों से भी भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और आत्मसमर्पण करें. उनका मानना है कि सामान्य जीवन में ही असली सुकून और सम्मान है.

वादों का इंतजार, सुविधाएं नहीं मिलने का दर्द

हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच कुछ महिलाओं का दर्द भी सामने आया. उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के समय सरकार द्वारा आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं के वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाया है. इसके बावजूद वे अपने फैसले से खुश हैं और परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं.

सरकार के दावे और जमीनी हकीकत

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या समाप्त करने का दावा किया जा रहा है. ऐसे में आत्मसमर्पित नक्सलियों का यह अनुभव और उनकी स्थिति इस दावे की जमीनी सच्चाई को भी सामने लाता है, जहां बदलाव तो दिख रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी बाकी हैं.

सीएम साय ने बताया ऐतिहासिक क्षण

छत्तीसगढ़ के सीएम साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वागत किया और उनसे बातचीत की. सीएम ने कहा कि लगातार नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं और वे खुश भी हैं. सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त ही हो गया है, सिर्फ तारीख का इंतजार है.

आज ऐतिहासिक क्षण है. 140 पुनर्वासित भाई बहन, जो पहले भटक गए थे, वह अब मुख्यधारा से जुडे़ हैं और आज विधानसभा भवन में आए हैं. यह खुशी की बात है. सभी का स्वागत है. हमने बातचीत किया है. हमने पूछा है कि पहले की जिंदगी और अब की जिंदगी में क्या फर्क महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब अच्छा लग रहा है. पहले भी 120 आत्मसमर्पित नक्सली छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देख चुके हैं-विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़

मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व नक्सलियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझा. छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया.मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है.