नये सिरे से नये मिसाइल परीक्षण किया
सियोल: पूर्व एशिया में सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। शनिवार की शाम उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य शक्ति का आक्रामक प्रदर्शन करते हुए जापान सागर (पूर्वी सागर) की ओर एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ये मिसाइलें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिन्होंने समुद्र में गिरने से पहले लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय की। प्योंगयांग के सरकारी मीडिया और सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण कोई सामान्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक सीधा राजनीतिक संदेश है।
वर्तमान में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास फ्रीडम शील्ड चल रहा है। उत्तर कोरिया हमेशा से इन अभ्यासों को अपनी संप्रभुता पर हमले की तैयारी और युद्ध का पूर्वाभ्यास मानता रहा है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने हाल ही में अपनी सेना को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए अभ्यास तेज करने का कड़ा निर्देश दिया था। शनिवार का परीक्षण इसी सैन्य आक्रामक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
400 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइलें दक्षिण कोरिया के अधिकांश सैन्य ठिकानों और रणनीतिक केंद्रों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल प्रणालियों को और अधिक परिष्कृत कर रहा है, ताकि वे रडार की नजरों से बच सकें और मोबाइल लॉन्चर के जरिए कहीं से भी दागी जा सकें। इस परीक्षण ने टोक्यो से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है:
जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताया है। जापानी तट रक्षक दल ने समुद्र में सक्रिय जहाजों को गिरने वाले मलबे से संभावित खतरे की चेतावनी दी है। अमेरिका ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सियोल और टोक्यो के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करना और सैन्य समन्वय बढ़ाना शुरू कर दिया है।
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर कोरिया अपनी परमाणु निवारक क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार नई तकनीकों का परीक्षण कर रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि इस तरह के छोटे-छोटे परीक्षण भविष्य में किसी बड़े उकसावे या सातवें परमाणु परीक्षण की भूमिका हो सकते हैं। कोरियाई प्रायद्वीप अब एक ऐसे दौर में है जहाँ एक छोटी सी गलतफहमी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को जन्म दे सकती है।