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मास्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला

रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने सोलह को हवा में नष्ट किया

मॉस्को: यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष अब सीमावर्ती क्षेत्रों की सीमाओं को लांघकर सीधे सत्ता के केंद्रों तक पहुँच गया है। शनिवार की शाम रूसी राजधानी मॉस्को एक बार फिर भीषण यूक्रेनी ड्रोन हमलों का निशाना बनी। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने आधिकारिक पुष्टि की कि रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने शहर की ओर बढ़ रहे 16 घातक ड्रोनों को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया। यह हमला हाल के हफ्तों में मॉस्को पर किए गए सबसे बड़े और सबसे सुनियोजित हवाई हमलों में से एक माना जा रहा है।

रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यूक्रेन की ओर से भेजे गए इन ड्रोनों का मुख्य लक्ष्य मॉस्को के रणनीतिक और रिहायशी इलाके थे। अधिकांश ड्रोनों को मॉस्को के बाहरी इलाकों, विशेष रूप से ओडिनत्सोवो और रामेंस्की जिलों के ऊपर मार गिराया गया। रूसी सेना ने अपने पैंटसिर और एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का उपयोग कर इन खतरों को निष्क्रिय किया।

हालांकि रूसी दावों के अनुसार किसी बड़ी सरकारी इमारत या सैन्य ठिकाने को सीधा नुकसान नहीं पहुँचा है, लेकिन आसमान से गिरते हुए मलबे ने शहर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। गिरते मलबे के कारण कुछ आवासीय कॉलोनियों में आग लग गई और विस्फोट के दबाव से कई इमारतों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मॉस्को के दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों—वनुकोवो और डोमोडेडोवो को कई घंटों के लिए बंद करना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप दर्जनों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को डायवर्ट किया गया या रद्द करना पड़ा।

यूक्रेन ने हमेशा की तरह इस विशिष्ट हमले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि कीव की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। कीव अब सीधे रूसी नागरिकों और नेतृत्व को यह अहसास कराना चाहता है कि युद्ध केवल यूक्रेन की धरती तक सीमित नहीं है। मॉस्को जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों को निशाना बनाकर रूस की वायु रक्षा क्षमताओं को चुनौती दी जा रही है।

क्रेमलिन ने इस हमले को आतंकवादी कृत्य करार देते हुए चेतावनी दी है कि इसका जवाब कठोरतम सैन्य कार्रवाई के रूप में दिया जाएगा। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि युद्ध अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ दोनों देशों के आंतरिक शहर और नागरिक बुनियादी ढाँचे सीधे युद्ध क्षेत्र में तब्दील होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को डर है कि इस तरह के हमलों से युद्ध और अधिक हिंसक रूप ले सकता है।