Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मंदिर और घर की पूजा: आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए क्या है सही तरीका? जानिए गुरुजी के अनुसार दोनों का म... गर्मियों में पेट की समस्याओं से हैं परेशान? एक्सपर्ट से जानें आंतों की नेचुरली सफाई और कब्ज से बचने ... Mission Punjab 2027: पंजाब फतह की तैयारी में जुटे अमित शाह, 'नशा मुक्त पंजाब' के जरिए AAP को घेरने क... मतदान का उत्साह: पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद का सबसे अधिक भागीदारी वाला चुनाव देखा गया, जहाँ दोनों... Vaishali News: पुलिस की वर्दी पहन चौकीदार के बेटे ने बनाई रील, थाने की जीप का भी किया इस्तेमाल; पुलि... Udaipur Crime: बहन की मौत का बदला! जीजा को घर से अगवा कर जंगल ले गया साला, पत्थरों से सिर कुचलकर की ... सीमांचल में भारत-नेपाल रिश्तों को नई पहचान: भारतीय पुरुषों से ब्याही नेपाली महिलाओं को मिलेगी नागरिक... West Bengal Election 2026: बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान, दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग; अब 4 मई को खुल... दिल्ली-NCR में आग का खतरा: ऊंची बिल्डिंग्स में 'मौत का साया', फायर विभाग के संसाधन नाकाफी; आंकड़ों न... IPL 2026: बुमराह और पंड्या से बेहतर रिकॉर्ड, फिर भी शार्दुल ठाकुर को क्यों नजरअंदाज किया? कप्तान के ...

थरूर का मणिशंकर अय्यर को करारा जवाब: “विदेश नीति भाषण देने के लिए नहीं, देश के हित के लिए होती है!” खुले खत में खोली ‘नैतिकता’ की पोल

कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. हाल ही में सीनियर कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर ने लोकसभा सांसद और संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर की विदेश नीति पर टिप्पणियों और उनके चरित्र पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र लिखा था. यह पत्र फ्रंटलाइन मैगजीन में छपा, जिसमें अय्यर ने थरूर के अमेरिका-इजराइल के साथ संबंधों, ईरान युद्ध पर उनके प्रैग्मेटिक रुख को ‘might is right’ की नीति और नैतिक समझौता बताते हुए आलोचना की थी. अब थरूर ने इसका खुला जवाब दिया है.

अय्यर ने थरूर पर नेहरूवादी नॉन-अलाइनमेंट और गांधीवादी सिद्धांतों से दूर होने का आरोप लगाया, साथ ही उनके विचारों को अमोरल और ट्रांजेक्शनल बताया इस पत्र के जवाब में शशि थरूर ने अब एक बड़ा खुला पत्र लिखा है. जिसका शीर्षक है, “असहमति और लोकतंत्र पर मणि शंकर अय्यर के नाम एक खुला पत्र”.

थरूर ने इसमें लोकतंत्र में असहमति की अहमियत बताते हुए कहा कि अलग राय रखना गलत नहीं, लेकिन किसी की नीयत, देशभक्ति या चरित्र पर सवाल उठाना अनुचित है. थरूर ने अपने पत्र में कईं बिंदुओं को उठाए, उन्होंने हमेशा भारत के राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सम्मान को प्राथमिकता दी है. विदेश नीति में सिद्धांत (principles) और व्यावहारिकता (pragmatism) का संतुलन जरूरी है, जो नेहरू की नॉन-अलाइनमेंट से लेकर आज की मल्टी-अलाइनमेंट डिप्लोमेसी तक रहा है.

मोरल सरेंडर नहीं, बल्कि जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है

थरूर ने अपने पत्र में लिखा, “मोरल सरेंडर” नहीं, बल्कि जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है कि यथार्थ को समझा जाए. उदाहरण देते हुए उन्होंने सोवियत यूनियन के साथ रिश्तों के दौरान हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान जैसे मामलों में भारत के संतुलित रुख का जिक्र किया. खाड़ी देशों से जुड़े हितों पर कोई फैसला लेते हुए (200 अरब डॉलर व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, 90 लाख भारतीय कामगार) को ध्यान में रखना जरूरी बताया.

हाल के इंडियन एक्सप्रेस लेख का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया और इसे तुरंत खत्म करने की मांग की, लेकिन अमेरिका से जुड़े हितों को खतरे में डालना समझदारी नहीं. अपनी विदेश यात्राओं पर आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर बाकी यात्राएं निजी क्षमता में थीं, यूनिवर्सिटी और संस्थानों के निमंत्रण पर.

इजराइल-फिलिस्तीन पर हमेशा two-state solution का समर्थन

शशि थरूर ने पत्र कहा कि इजराइल-फिलिस्तीन पर हमेशा two-state solution का समर्थन किया और पाकिस्तान पर अपनी राय दोहराई. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पक्ष रखते हुए कहा, “भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है. हम शांति चाहते हैं, लेकिन शांति कमजोरी नहीं. आतंकवाद पर मजबूती से जवाब देंगे. सबरीमाला और जन्मतिथि वाली टिप्पणियों पर भी सफाई दी.

अंत में अय्यर के समर्थन और निलंबन के दौरान अपनी आवाज उठाने का जिक्र करते हुए कहा कि रास्ते अलग होने की बात गलत है, लेकिन हाल की टिप्पणियों पर जवाब देना जरूरी था. यह विवाद कांग्रेस में विदेश नीति, नैतिकता vs व्यावहारिकता और पार्टी एकता पर बहस को फिर तेज कर रहा है, खासकर जब पार्टी पहले से ही आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है। थरूर का यह पत्र लोकतंत्र में असहमति की जगह और राष्ट्रीय हितों पर संतुलित दृष्टिकोण की वकालत करता नजर आता है.