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केदारनाथ धाम की पवित्र छड़ी गायब

खबर फैलते ही सरकार तक में हड़कंप, जांच के आदेश

  • चार धाम यात्रा से पहले बुरी खबर

  • सीएम धामी सूचना को लेकर गंभीर

  • इस दंड को रूप छड़ कहा जाता है

राष्ट्रीय खबर

देहरादून: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग, भगवान केदारनाथ के पावन धाम से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। केदारनाथ मंदिर की रूप छड़, जिसे साक्षात भगवान केदारनाथ का प्रतीक और उनका स्वरूप माना जाता है, बदरी-केदार मंदिर समिति की सुरक्षित अभिरक्षा से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई है।

चांदी से निर्मित इस बहुमूल्य राजदंड (सेंधिल) के गायब होने की सूचना मिलते ही पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया है और श्रद्धालुओं के बीच भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं।

सनातन परंपराओं और केदारनाथ धाम की सदियों पुरानी मान्यताओं के अनुसार, रूप छड़ केवल एक धातु का दंड नहीं, बल्कि एक अत्यंत पूजनीय धार्मिक प्रतीक है। यह छड़ मुख्य रूप से भगवान की चल विग्रह डोली के साथ चलती है। जब शीतकाल में भगवान केदारनाथ की डोली अपने शीतकालीन प्रवास उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करती है या ग्रीष्मकाल में पुनः धाम लौटती है, तब यह पवित्र छड़ उस पूरी यात्रा की शोभा और सुरक्षा का प्रतीक होती है।

पुजारी पंडित अशोक तिवारी बताते हैं कि चारधाम की परंपराओं में किसी भी अनुष्ठानिक वस्तु को देवता की निजी संपत्ति माना जाता है। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, इन पवित्र वस्तुओं को मंदिर की परिधि से बाहर किसी भी निजी या बाहरी उद्देश्य के लिए ले जाना वर्जित है।

बदरी-केदार मंदिर समिति पर इस घटना के बाद लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं। समिति की यह वैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह मंदिर के स्वर्ण, चांदी और अन्य बहुमूल्य गहनों व प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। रूप छड़ का गायब होना मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंध माना जा रहा है। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि यदि मंदिर के भीतर से भगवान के स्वरूप माने जाने वाले प्रतीक सुरक्षित नहीं हैं, तो यह प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा है कि आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जांच अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मंदिर समिति के अभिलेखों की जांच करें और यह पता लगाएं कि अंतिम बार यह छड़ किसके पास थी और इसे कब गायब पाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि इसमें किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता या लापरवाही पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में, पुलिस और प्रशासन की टीमें मंदिर समिति के साथ समन्वय कर इस बेशकीमती प्रतीक की तलाश में जुट गई हैं।