Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Amravati News: 108 लड़कियों से दरिंदगी और 350 वीडियो वायरल; जानें अमरावती 'वीडियो कांड' में कैसे बिछ... MP Crime News: झाबुआ में अमानवीयता की सारी हदें पार, महिला का मुंडन कर कंधे पर पति को बैठाकर गांव मे... Cyber Crime News: 'आपका नंबर पहलगाम आतंकी के पास है...' कॉल पर डराकर बुजुर्ग से 73 लाख की ठगी, जानें... Bihar New CM: बिहार में रचा गया इतिहास, सम्राट चौधरी बने पहले BJP मुख्यमंत्री; विजय चौधरी और विजेंद्... Bengal Election 2026: पांच संभाग और BJP का 'साइलेंट मिशन', चुनावी शोर के बीच ऐसे बंगाल फतह की रणनीति... Punjab J&K Dispute: पंजाब और जम्मू-कश्मीर में फिर तकरार, जानें क्या है 1979 का वो समझौता जिसका जिक्र... Punjab News: पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में भीषण सड़क हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस पलटने से 6 की मौत, 25... MP Board 10th, 12th Result 2026: आज सुबह 11 बजे जारी होंगे मध्य प्रदेश बोर्ड के नतीजे, यहाँ देखें Di... ED Raid on AAP MP: आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की रेड, पंजाब से गुरुग्राम त... Chirag Paswan visits Pashupati Paras: अस्पताल में चाचा पशुपति पारस से मिले चिराग पासवान, पैर छूकर लि...

Geopolitics News: मध्य पूर्व तनाव की आड़ में चीन खेल रहा बड़ा खेल, क्या भारत की बढ़ने वाली है टेंशन?

ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर से तनाव चरम पर है. मिसाइलों और हमलों के इस शोर के बीच एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है. दुनिया भर की नजरें मिडिल ईस्ट के सुलगते हालात पर टिकी हैं, लेकिन इसी बीच चीन ने एक बेहद रणनीतिक चाल चल दी है. यह लड़ाई सिर्फ दो देशों की नहीं रह गई है. अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं. एक तरफ जहां युद्ध की वजह से कच्चे तेल के दाम भड़कने की आशंका है, वहीं ड्रैगन इस वैश्विक संकट को एक बड़े कारोबारी मौके की तरह इस्तेमाल कर रहा है. आइए समझते हैं कि आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और आपकी रसोई से लेकर रोजमर्रा के खर्चों पर इसका क्या असर होगा.

समंदर का वो अहम रास्ता, जहां से तय होती है तेल की कीमत

मिडिल ईस्ट का यह तनाव सीधे तौर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर गंभीर चोट कर रहा है. ईरान हर दिन करीब 33 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. यह दुनिया भर की कुल सप्लाई का लगभग 3 प्रतिशत है. इस युद्ध का सबसे बड़ा खतरा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर मंडरा रहा है. यह समुद्री रास्ता इसलिए बेहद खास है क्योंकि दुनिया के कुल तेल कारोबार का करीब 20 फीसदी हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है.

अमेरिका ने जबसे इस इलाके में अपनी सैन्य हलचल बढ़ाई है, कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी का उछाल आ चुका है. युद्ध शुरू होने से पहले ही जनवरी के पहले हफ्ते की तुलना में मिडिल ईस्ट से तेल शिपिंग की लागत 584 फीसदी तक बढ़ गई है. हालात यह हैं कि मिडिल ईस्ट से चीन जाने वाले बड़े जहाजों (2 मिलियन बैरल क्षमता) का एक दिन का किराया दो लाख डॉलर के पार पहुंच गया है. जानकारों का मानना है कि अगर यह लड़ाई नहीं रुकी, तो क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक जा सकती है.

युद्ध की आड़ में चीन ने कैसे भर ली अपनी तिजोरी?

जब पूरी दुनिया संभावित आर्थिक नुकसान से डरी हुई है, तब चीन चुपचाप अपनी ऊर्जा तिजोरी भरने में जुटा है. हाल के दिनों में चीन ने रूस, सऊदी अरब और ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदा है. सऊदी अरब की प्रमुख ऑयल शिपिंग कंपनी ‘बहरी’ ने चीन को पांच विशाल सुपरटैंकर भेजे हैं, जो पिछले छह महीनों में सबसे बड़ी खेप है.

बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती. सऊदी अरब ने अगले महीने चीन को 8 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल भेजने की तैयारी कर ली है. अमेरिका के साथ बढ़ती तल्खी के बीच ईरान ने भी चीन को तेल की सप्लाई कई गुना तेज कर दी है. 15 से 20 फरवरी के बीच ईरान का क्रूड निर्यात 200 फीसदी उछलकर 20 मिलियन बैरल पर पहुंच गया. यह रोजाना करीब 3 मिलियन बैरल बैठता है, जो ईरान के सामान्य एक्सपोर्ट से कहीं ज्यादा है. सैटेलाइट तस्वीरों ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि ईरानी बंदरगाहों पर तेल टैंकरों की संख्या 8 से बढ़कर 18 हो गई है. पिछले साल अमेरिकी हमले से पहले और 2024 की शुरुआत में भी ईरान ने बिल्कुल ऐसा ही पैटर्न अपनाया था.

सस्ते में खरीदकर भारी मुनाफा कूटने की तैयारी में ड्रैगन

चीन इस समय दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है. आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल उसने रोजाना 11.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो 2024 की तुलना में 4.4 फीसदी अधिक है. ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर ही टिकी है और उसका ज्यादातर तेल चीन ही जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने अपने देश में कच्चे तेल का एक विशाल भंडार जमा कर लिया है. उसकी रणनीति एकदम साफ है. उसने इस तनावपूर्ण माहौल में सस्ते दामों पर भारी मात्रा में तेल खरीदा है. भविष्य में जब होर्मुज की खाड़ी में आवाजाही प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छुएंगी, तब चीन इसी तेल को बेचकर मोटा पैसा कमाएगा.

भारत के लिए खतरे की घंटी, जेब पर कैसे पड़ेगी मार?

यह पूरी उथल-पुथल भारत के लिए एक बड़ा अलर्ट है. पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 2.03 डॉलर (2.87 फीसदी) की तेजी के साथ 72.87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ. अगर होर्मुज का रास्ता बंद होता है और तेल 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है. चिंता की बात यह है कि हमारे देश का आधे से ज्यादा तेल इसी प्रभावित रास्ते से आता है. कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा मतलब है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे. ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिससे राशन, सब्जियां और रोजमर्रा की सभी चीजों की कीमतों में उछाल आएगा.