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सीरिया की पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर गोलीबारी की खबर

असद समर्थकों और आईएसआईएल का हमला जारी

दमिश्कः सीरिया एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है क्योंकि देश को दोहरे मोर्चों पर भीषण संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम में अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के वफादार लड़ाके और पूर्व में खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएल ने नए शासन की स्थिरता को चुनौती दी है।

ताजा घटनाक्रम में, अलावी-बहुल तटीय प्रांत लटाकिया में सीरियाई आंतरिक सुरक्षा बलों और असद सरकार से जुड़ी एक मिलिशिया के बीच हुई झड़पों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है। यह संघर्ष जबलेह के ग्रामीण इलाके हमाम अल-कराहलेह गाँव के पास तब भड़का जब सुरक्षा बलों ने सराया अल-जवाद (अल-जवाद ब्रिगेड) नामक एक गुप्त सशस्त्र समूह के ठिकानों पर छापेमारी की। आधिकारिक मीडिया के अनुसार, इस मुठभेड़ में सुरक्षा बल का एक जवान शहीद हो गया, जबकि जवाबी कार्रवाई में मिलिशिया के एक शीर्ष कमांडर और उसके दो साथियों को ढेर कर दिया गया।

सराया अल-जवाद का उदय सीरिया के लिए एक नई चिंता का विषय है। अगस्त 2025 में गठित यह समूह कथित तौर पर ब्रिगेडियर-जनरल सुहेल अल-हसन का वफादार है, जो पूर्व शासन की कुख्यात टाइगर फोर्सेस का नेतृत्व करता था। गृह मंत्रालय ने इस समूह पर देश में अस्थिरता फैलाने, हत्याएं करने और बम धमाकों के जरिए सार्वजनिक समारोहों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। यह कार्रवाई दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार द्वारा डीप स्टेट (पुरानी व्यवस्था के गुप्त नेटवर्क) को खत्म करने के प्रयासों का हिस्सा है।

वहीं दूसरी ओर, देश के पूर्वी हिस्से में आईएसआईएल ने फिर से सिर उठा लिया है। सोमवार को दीर अज़-ज़ोर प्रांत में सुरक्षा चौकियों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी आईएलआईएल ने ली है। अल-मायादीन और अल-सबाहियाह में हुए इन हमलों में कुल पांच सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

आंतरिक मंत्री अनस खत्ताब ने इन दोनों मोर्चों को एक-दूसरे से जुड़ा बताया है और आरोप लगाया है कि पुराने शासन के अवशेष और आईएलआईएल मिलकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके साथ ही, अल-होल कैंप से संदिग्ध ISIL सदस्यों के परिजनों के सामूहिक रूप से भागने की खबरों ने सुरक्षा वैक्यूम को और गहरा कर दिया है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तटीय इलाकों और पूर्वी रेगिस्तान में एक साथ हुई ये हिंसा कोई संयोग नहीं है। विश्लेषकों का संकेत है कि ईरान जैसे बाहरी तत्व, जिन्होंने सीरिया में अपना प्रभाव खो दिया है, पुरानी खुफिया एजेंसियों के स्लीपर सेल्स को सक्रिय कर रहे हैं ताकि नई सीरियाई सरकार को कमजोर और अक्षम दिखाया जा सके।

राजनीतिक शोधकर्ता बासम अल-सुलेमान ने चेतावनी दी है कि सीरियाई बादिया (रेगिस्तान), जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है, उग्रवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन सकता है। सरकार को अब अरब कबीलों को अपने साथ जोड़कर इस सुरक्षा शून्यता को भरने की तत्काल आवश्यकता है।