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थाईलैंड में अचानक 72 बाघों की मौत

बर्ड फ्लू नहीं कैनाइन डिस्टेंपर वायरस ने इनकी जान ली

बैंकॉक: उत्तरी थाईलैंड के दो प्रमुख पर्यटन पार्कों में 72 बाघों की मौत के मामले ने हड़कंप मचा दिया था, लेकिन थाई अधिकारियों ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता का विषय नहीं है। जांच में पाया गया है कि बाघों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर नामक वायरस से हुई है, जो इंसानों को प्रभावित करने के लिए नहीं जाना जाता है। इस स्पष्टीकरण ने उन आशंकाओं को दूर कर दिया है कि ये मौतें बर्ड फ्लू के कारण हुई थीं।

घटना और स्वास्थ्य निगरानी चियांग माई प्रांत के माई तांग और माई रिम जिलों में स्थित पार्कों में 8 से 18 फरवरी के बीच मात्र 10 दिनों के भीतर इन बाघों की मौत हुई थी। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री पट्टाना प्रोमफात ने बैंकॉक में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, अब तक जानवरों से इंसानों में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर उन लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है जो हाल ही में इन जानवरों के संपर्क में आए थे।

बर्ड फ्लू की आशंका का खंडन चियांग माई क्षेत्रीय पशुधन कार्यालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि शव परीक्षण के दौरान बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के आनुवंशिक पदार्थ और बैक्टीरियल संक्रमण के निशान मिले, लेकिन एवियन इन्फ्लुएंजा टाइप ए (बर्ड फ्लू) का कोई वायरस नहीं पाया गया। एशिया के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू के फिर से उभरने के कारण जनता में काफी भय था। थाईलैंड में 2004 से 2007 के बीच पोल्ट्री से होने वाले इन्फ्लुएंजा से 25 संक्रमित मरीजों में से 17 की मौत हो गई थी, इसलिए सरकार तुरंत स्पष्टीकरण देने के लिए आगे आई है।

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस कुत्तों और बिल्लियों (बड़ी बिल्लियों सहित) दोनों के लिए संक्रामक है। यह शारीरिक तरल पदार्थों और हवा के माध्यम से फैल सकता है। अधिकारियों ने बताया कि बंद वातावरण (चिड़ियाघर या पार्क) में रहने वाले बाघ, जो पहले से ही तनाव और इनब्रीडिंग (अंतःप्रजनन) के कारण शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं, इस वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

निपटान और भविष्य की जांच पशुधन विकास विभाग के महानिदेशक सोमचुआन रत्तनमंगक्लानन ने बताया कि बाघों के अवशेषों का पोस्टमार्टम करने के बाद उन्हें कीटाणुरहित कर जला दिया गया और दफना दिया गया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी की गई ताकि अवशेषों के किसी भी गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। टाइगर किंगडम के नाम से संचालित ये दोनों पार्क फिलहाल बंद हैं।

हालांकि, पोस्टमार्टम में शामिल पशुचिकित्सक विजिट अर्सैथमकुल ने चिंता व्यक्त की है कि संक्रमण का मूल स्रोत अभी भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने संदेह जताया कि चूंकि दोनों पार्क केवल 30 किमी की दूरी पर हैं, इसलिए संक्रमण का कारण वह भोजन हो सकता है जो दोनों पार्कों को एक ही स्रोत से मिलता था। अधिकारियों ने जनता को पोल्ट्री उत्पादों के सेवन के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि पड़ोसी देशों में बर्ड फ्लू के खतरे अभी भी बने हुए हैं।