Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bageshwar Dham: ऑस्ट्रेलिया से लौटे बागेश्वर सरकार, 4 लाख भक्तों को दी 'ऑनलाइन सिद्ध मंत्र' और यज्ञ-... Wheat Procurement: गेंहू खरीदी में अव्यवस्था पर भड़का भारतीय किसान संघ, प्रदेश भर में बड़े आंदोलन की... Ujjain News: उज्जैन में खदान में नहाने गए 9 किशोर डूबे, 7 को बचाया गया, 2 की मौत; करौंदिया गांव में ... Pritam Lodhi vs SDOP: विधायक प्रीतम लोधी का खुला चैलेंज- '15 दिन में माफी मांगो वरना 10 हजार लोग SDO... Mystery News: पुलिस कस्टडी से 2000 लीटर 'माल' रहस्यमयी तरीके से गायब, खाकी की अजीबोगरीब थ्योरी सुनकर... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '...

अगले साल दुनिया की सबसे बड़ी खदान बनेगी

छत्तीसगढ़ की गेवरा माइंस रिकार्ड बनाने की ओर अग्रसर

  • वैश्विक स्तर पर रचेगी कीर्तिमान

  • भविष्य की योजनाएं और विविधीकरण

  • सरकार के साथ सौर ऊर्जा पर भी काम

रायपुरः कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा संचालित गेवरा खदान अगले साल तक दुनिया की शीर्ष कोयला उत्पादक खदान बनने का गौरव हासिल करने वाली है। एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को घोषणा की कि यह खदान 63 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त कर अमेरिका की सबसे बड़ी खदानों को पीछे छोड़ देगी।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित गेवरा खदान वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है। वर्ष 1981 से संचालित यह खदान इस साल 56 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करेगी। विशेष बात यह है कि इस खदान को अपनी क्षमता बढ़ाकर 70 मिलियन टन प्रति वर्ष करने के लिए आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।

एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहान ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य साझा करते हुए कहा, अगले साल तक, अकेले गेवरा खदान 63 मिलियन टन उत्पादन करेगी और दुनिया की नंबर एक कोयला खदान बन जाएगी। वर्तमान में अमेरिका के व्योमिंग में स्थित ब्लैक थंडर माइंस 61-62 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया की सबसे बड़ी खदान है, जिसके बाद नॉर्थ एंटेलोप रोशेल खदान का नंबर आता है। सीएमडी ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार प्रमुख संसाधनों—भूमि, मशीनरी, जनशक्ति और ग्राहकों की मांग—की आवश्यकता होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी के पास ये सभी संसाधन उपलब्ध हैं और भारतीय रेलवे के सहयोग से कोयले की निकासी के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है।

एसईसीएल केवल कोयला उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी भविष्य के ऊर्जा विकल्पों की ओर भी कदम बढ़ा रही है। कंपनी एसईसीएल क्षेत्र में 700 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की योजना बना रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर पानी पर तैरते सोलर पैनल प्रोजेक्ट्स पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी ने एक गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की पहचान की है। साथ ही, दुर्लभ मृदा तत्वों को निकालने के लिए वैज्ञानिक एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है।

कंपनी अगले साल मार्च तक अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रख रही है। इस आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग परियोजनाओं के विस्तार और विविधीकरण में किया जाएगा। गेवरा एरिया के महाप्रबंधक अरुण कुमार त्यागी ने विश्वास जताया कि 2026-27 तक हम अमेरिकी खदानों को पछाड़कर वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर लेंगे। यह न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के लिए एक बड़ी औद्योगिक उपलब्धि होगी।