Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की उद्योगपति सज्जन जिंदल से मुलाकात; राजपुरा में इस्पात क्षेत्र ... हेमंत सरकार की विकास की दौड़ में लंबी छलांग Digital Arrest Awareness: PM मोदी का देश को संदेश, डिजिटल अरेस्ट के फ्रॉड से कैसे बचें? जानें बैंक अ... आपलोग तो पहले से ही नंगे हो गये हैः नरेंद्र मोदी Security Alert: 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी से बड़ा खुलासा, पाकिस्तान-बांग्लादेश से जुड़े तार, कई शहरों... नरेंद्र मोदी फिर सरेंडर हो जाएंगेः राहुल गांधी मेरठ वालों की बल्ले-बल्ले! पीएम मोदी ने शुरू की मेरठ मेट्रो, अब दिल्ली पहुंचने में लगेगा एक घंटे से ... शंकराचार्य के खिलाफ अब यौन शोषण का केस Maharashtra Politics: राज्यसभा चुनाव से पहले आदित्य ठाकरे ने क्यों छेड़ा NCP विलय का मुद्दा? MVA के ... Crime News: गले पर चाकू और बेटी पर छोड़ा कुत्ता, मां को बचाने थाने पहुंची मासूम बच्ची; पुलिस ने ऐसे ...

Koderma News: कोडरमा में महिलाओं ने तैयार किया हर्बल गुलाल, इस होली रसायनों से मिलेगी मुक्ति

कोडरमा: होली के पावन त्योहार को लेकर कोडरमा जिले के लोचनपुर गांव में महिला समूहों की महिलाएं खास तैयारी में जुटी हैं. जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) से प्रशिक्षित महिलाएं खाद्य पदार्थों और प्राकृतिक सामग्रियों से हर्बल गुलाल का निर्माण कर रही हैं. यह गुलाल न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रहा है.

हर्बल गुलाल है सुरक्षित विकल्प

बाजार में उपलब्ध अधिकांश अबीर, गुलाल और रंगों में खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं, जो त्वचा में जलन, एलर्जी, आंखों में समस्या और अन्य स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं. इनके पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है. लोचनपुर की महिलाएं इन हानिकारक रंगों के विकल्प के रूप में हर्बल गुलाल बना कर स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं.

कोडरमा में महिलाएं बना रही हर्बल गुलाल (ETV Bharat)

प्राकृतिक सामग्रियों से बनते हैं रंग-बिरंगे हर्बल गुलाल

महिलाएं विभिन्न प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके अलग-अलग रंगों का हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं:

  • हरा रंग — पालक और करी पत्ता
  • पीला रंग — कच्ची हल्दी
  • नीला रंग — जैस्मिन के फूल
  • नारंगी रंग — गेंदा के फूल
  • लाल और गुलाबी रंग — बीट (चुकंदर) का जूस

ये सभी सामग्रियां घरेलू और आसानी से उपलब्ध हैं, जो गुलाल को पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त बनाती हैं.

महिला समूहों की एकजुटता और शुरुआती सफलता

रिश्ता महिला मंडल, सहेली महिला मंडल और पार्वती महिला मंडल की सदस्यें मिलकर यह कार्य कर रही हैं. ये महिलाएं आसपास के गांवों की रहने वाली हैं और कई वर्षों से महिला समूहों से जुड़ी हुई हैं. जेएसएलपीएस से मिले प्रशिक्षण के बाद यह पहली बार हर्बल गुलाल निर्माण का प्रयास है.

महिलाओं ने छोटी पूंजी (लगभग 2000 रुपये से शुरूआत) से इसकी शुरुआत की है, लेकिन धीरे-धीरे डिमांड बढ़ रही है. पिछले अनुभवों और समान प्रयासों से प्रेरित होकर वे उत्पादन बढ़ा रही हैं और आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर रही हैं.

महिलाओं की सशक्तता का अनुपम उदाहरण

यह प्रयास न केवल गांव में महिलाओं की एकजुटता और सशक्तिकरण को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और महिला आत्मनिर्भरता का सुंदर संगम भी प्रस्तुत करता है. लोचनपुर की ये महिलाएं होली के रंगों को न सिर्फ उत्सव का हिस्सा बना रही हैं, बल्कि एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की नींव भी रख रही हैं.