Manendragarh Civil Hospital News: मनेन्द्रगढ़ शासकीय सिविल अस्पताल के दावों की खुली पोल, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और डॉक्टरों का भारी टोटा
मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : मनेन्द्रगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को उन्नत कर 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल बनाए जाने के दावों के बीच अब व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं. कागज में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं का दावा किया जा रहा है, लेकिन अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का अनुभव कुछ अलग ही कहानी बता रहा है.
220 बिस्तर संचालित होने का दावा
अस्पताल प्रबंधन ने 220 बिस्तरों के संचालन का दावा किया है, लेकिन पूरी क्षमता से सेवाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं.अतिरिक्त भवन, राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और जनपद कार्यालय के भवनों का अस्थायी उपयोग कर वार्ड बनाए गए हैं. ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बिना पर्याप्त स्थायी आधारभूत संरचना और संसाधनों के इतनी बड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यवस्थाएं अभी भी संक्रमण काल में हैं और मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं पूरी तरह नहीं मिल पा रही हैं.अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने सबसे गंभीर समस्या पानी की बताई है.
हमारे परिवार के सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा. इधर-उधर ढूंढकर पानी लाना पड़ता है –रामदीन,ग्रामीण
कपड़े धोने और पीने के लिए पानी बाहर से लाना पड़ता है. पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है बहुत परेशानी होती है –केशकली,ग्रामीण
ग्रामीण महिला सोनमति ने भी शौचालय और पीने के पानी की समस्या के बारे में बताया है. सोनमति के मुताबिक टाइम से पानी नहीं मिलता. नल बहुत दूर है, वहां जाकर पानी लाना पड़ता है. वहीं अस्पताल में 15 विशेषज्ञ और 10 से अधिक एमबीबीएस डॉक्टरों की पदस्थापना का दावा किया जा रहा है. हालांकि जमीनी स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं की नियमित उपलब्धता को लेकर असंतोष देखा जा रहा है.
एक डॉक्टर के भरोसे स्त्री रोग विभाग
सबसे अधिक चिंता स्त्री रोग विभाग को लेकर सामने आ रही है, जहां वर्तमान में केवल एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं. उनके अवकाश या अनुपस्थिति की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.कई मामलों में मरीजों को जिला अस्पताल या बड़े शहरों की ओर रेफर किया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज के दावे कमजोर पड़ते नजर आते हैं.
आपातकालीन सेवा का भी बुरा हाल
अस्पताल प्रशासन 24 घंटे इमरजेंसी सेवा संचालित होने की बात कह रहा है. लेकिन गंभीर दुर्घटना या जटिल मामलों में आवश्यक उपकरण और विशेषज्ञों की तत्काल उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जटिल सर्जरी और गंभीर चिकित्सा मामलों में अब भी बड़े शहरों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है. वहीं सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे ने एक और स्त्री रोग विशेषज्ञ के संभावित ज्वाइन करने की जानकारी दी है.
अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है. संसाधनों और स्टाफ की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है. जल्द ही 220 बिस्तरों की पूरी क्षमता के साथ अस्पताल संचालित होगा- डॉ. स्वप्निल तिवारी, अस्पताल अधीक्षक
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अगले दो महीनों में 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल पूर्ण क्षमता से संचालित होने लगेगा. लेकिन स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह वादा भी अन्य घोषणाओं की तरह अधूरा ही रह जाएगा?. मनेन्द्रगढ़ का यह उन्नत सिविल अस्पताल यदि वास्तव में पूरी क्षमता और संसाधनों के साथ संचालित होता है, तो यह क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है. लेकिन जब तक बुनियादी सुविधाएं—जैसे पानी, पर्याप्त विशेषज्ञ, उपकरण और स्थायी ढांचा मजबूत नहीं होते, तब तक ‘कायाकल्प’ का दावा अधूरा ही माना जाएगा. अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासनिक दावे जमीनी स्तर पर कब और कितनी मजबूती से साकार होते हैं.