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हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिका खारिज

पहले हाई कोर्ट में यह मामला ले जाएः सुप्रीम कोर्ट

  • अदालत राजनीति का अखाड़ा नहीं

  • चुनाव के वक्त हमेशा ऐसा होता है

  • हाईकोर्ट के पास पूर्ण अधिकार भी है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण) के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले के याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित उच्च न्यायालय (गुवाहाटी हाई कोर्ट) का दरवाजा खटखटाना चाहिए। न्यायालय ने सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

सुनवाई की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, जब भी चुनाव आते हैं, यह अदालत एक राजनीतिक युद्ध का मैदान बन जाती है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आपसी सम्मान और संयम के साथ चुनाव लड़ने की अपील की। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 32 का उपयोग सीधे तौर पर उन मामलों में नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें उच्च न्यायालय प्रभावी ढंग से सुलझा सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आने का चलन उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के मनोबल को गिराने और उनकी शक्ति को कम करने जैसा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला केवल अपराध का नहीं, बल्कि संवैधानिक पद की शपथ के उल्लंघन का भी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को अभ्यस्त अपराधी बताते हुए कहा कि वे एक विशेष समुदाय के खिलाफ खुलेआम जहर उगल रहे हैं, जिससे देश का सामाजिक ताना-बनाना खतरे में है।

सिंघवी ने मांग की कि चूंकि मामला एक मुख्यमंत्री के खिलाफ है और इसमें एसआईटी जांच की आवश्यकता है, इसलिए गुवाहाटी हाई कोर्ट के बजाय सुप्रीम कोर्ट को ही इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि असम नहीं, तो किसी अन्य राज्य के हाई कोर्ट में सुनवाई की अनुमति दी जाए।

सिंघवी की असम से बाहर सुनवाई वाली दलील पर मुख्य न्यायाधीश ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण सबमिशन बताते हुए खारिज कर दिया और कहा, यह उच्च न्यायालयों को नीचा दिखाने का एक सुनियोजित प्रयास है। व्यवस्था पर भरोसा रखें। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के पास भी एसआईटी गठित करने और राज्य के बाहर के अधिकारियों को नियुक्त करने की पूरी शक्ति है। पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे इस मामले में याचिकाकर्ताओं को शीघ्र सुनवाई प्रदान करें।