वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने व्यापार समझौते पर राय दी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने शनिवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा कि सरकार का आत्मनिर्भर भारत का दावा अब पूरी तरह से ट्रंप पे निर्भर में बदल गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत की विदेश और आर्थिक नीतियों को अमेरिका के साथ जोड़ने पर सहमति जता दी है, जो देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।
सिब्बल ने हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर सेवा तीर्थ और केंद्रीय सचिवालय की इमारतों कर्तव्य भवन 1 और 2 के उद्घाटन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने देश के प्रति अपने वास्तविक कर्तव्य को पूरा किया है? सिब्बल ने कहा, इमारतें बनाना अच्छी बात है और हम सत्यमेव जयते सुनते हैं, लेकिन पिछले 11 वर्षों में केवल असत्य की जीत होती दिख रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी चुनाव जीतना तो जानती है, लेकिन शासन करना नहीं।
अमेरिकी कार्यकारी आदेशों का हवाला देते हुए सिब्बल ने दावा किया कि वाशिंगटन ने संकेत दिया है कि यदि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल खरीदना जारी रखता है, तो उस पर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित बयानों को उद्धृत करते हुए कहा कि अमेरिकी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि भारत अब राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मामलों में अमेरिका के साथ तालमेल बिठा चुका है।
सिब्बल ने विशेष रूप से अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान और सेवाओं को खरीदने की कथित प्रतिबद्धता की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि इतने बड़े पैमाने पर आयात की बाध्यता भारत की आर्थिक स्वायत्तता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि वे इस व्यापार समझौते की पारदर्शिता और देश के हितों पर इसके प्रभाव को लेकर संसद में विस्तृत बयान दें। फिलहाल सरकार की ओर से सिब्बल के इन तीखे आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।