सवा करोड़ से अधिक महिलाओं को पांच हजार
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हाल ही में नई योजना के तहत 1.31 करोड़ महिला लाभार्थियों के खाते में सीधे 5,000 रुपये जमा करने की घोषणा की है। यह कदम राज्य की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह राशि फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने की किस्तों का अग्रिम भुगतान है, जिसमें नियमित सहायता के साथ-साथ अतिरिक्त समर कंपोनेंट भी शामिल है।
स्टालिन ने एक वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्णय आगामी विधानसभा चुनावों से पहले योजना को रोकने की साजिशों को नाकाम करने के लिए लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आचार संहिता की आड़ में इस मासिक सहायता को तीन महीने के लिए रुकवाने का प्रयास कर रही थी।
स्टालिन का तर्क है कि यदि चुनाव के दौरान यह 1,000 रुपये की मासिक सहायता रुक जाती, तो गरीब परिवारों को बच्चों की शिक्षा, दवाओं और घरेलू खर्चों के लिए भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता। द्रविड़ मॉडल सरकार ने इन डिजाइनों को विफल करने के लिए एकमुश्त भुगतान का रास्ता चुना।
द्रमुक सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस याचिका से भी प्रेरित है, जो भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। इस याचिका में चुनाव से पहले सरकारी खजाने से मुफ्त उपहार बांटने पर रोक लगाने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसे तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया है और मार्च में विस्तृत सुनवाई तय की है। तमिलनाडु सरकार को डर था कि मार्च में कोर्ट के किसी संभावित आदेश का हवाला देकर इस योजना पर रोक लगाई जा सकती है, जिससे चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुँच सकता था।
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर रेवड़ी संस्कृति के खिलाफ चेतावनी देते रहे हैं, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसी ही योजनाएं धड़ल्ले से चल रही हैं। असम में ओरुनोडोई, मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना (1,250 प्रतिमाह), और महाराष्ट्र में लाडकी बहिन जैसी योजनाएं इसके उदाहरण हैं। सूत्रों के अनुसार, असम सरकार भी सुप्रीम कोर्ट के संभावित आदेश से बचने के लिए 20 फरवरी तक अग्रिम भुगतान की योजना बना रही है। स्टालिन ने साफ कर दिया है कि यदि वे सत्ता में लौटते हैं, तो इस मासिक सहायता को बढ़ाकर 2,000 रुपया कर दिया जाएगा।