भोपाल से भागकर तमिलनाडु में नारियल बेच रहा था
राष्ट्रीय खबर
भोपालः केंद्रीय जांच ब्यूरो की भोपाल इकाई ने लगभग ढाई दशक से फरार चल रहे एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। दूरसंचार विभाग में भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी यह व्यक्ति साल 2001 से मुकदमे से बच रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अपनी पहचान बदलकर तमिलनाडु में नारियल बेचने का काम कर रहा था।
आरोपी पी.एम. अब्दुल रज्जाक को 13 फरवरी, 2026 को तमिलनाडु के सलेम जिले के जलकंडापुरम से गिरफ्तार किया गया। यह मामला 16 अक्टूबर 1995 को दर्ज किया गया था। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने रज्जाक और तत्कालीन विभागीय प्रबंधक मुकेश गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। आरोप था कि इन लोगों ने मिलकर दूरसंचार विभाग को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया था। 29 जून 1999 को रज्जाक सहित पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन 2001 में रज्जाक अचानक गायब हो गया और अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
2001 में विशेष सीबीआई न्यायाधीश द्वारा स्थायी वारंट जारी होने के बाद से रज्जाक का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। हाल ही में सीबीआई ने पुराने फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया। अधिकारियों ने तकनीकी इनपुट और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया, जिससे सुराग सलेम तक जा पहुँचा। एजेंसी के अनुसार, रज्जाक ने जमानत जंप करने के बाद अपने परिवार के साथ मध्य प्रदेश छोड़ दिया था। उसने अपनी पहचान बदलकर अब्दुरसाक रख ली थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए नारियल बेचने का छोटा-सा काम शुरू कर दिया था। वह पिछले 25 वर्षों से कानून की नजरों से बचकर एक साधारण जीवन जी रहा था।
13 फरवरी को दोपहर करीब 3:10 बजे सीबीआई ने उसे धर दबोचा। 14 फरवरी को उसे ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाया गया और विशेष सीबीआई न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। इस गिरफ्तारी के साथ ही वह मामला, जो पिछले दो दशकों से आरोपी की अनुपस्थिति के कारण रुका हुआ था, अब दोबारा शुरू हो गया है। सीबीआई की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितनी भी पहचान बदल ले, वह बच नहीं सकता।