अदालत ने एन. वासु को जमानत दी
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जांच दल ने चार्जशीट दाखिल नहीं की
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दरवाजों के सोने की परत की चोरी
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ईडी भी अलग से जांच कर रही है
राष्ट्रीय खबर
तिरुअनंतपुरमः केरल के कोल्लम स्थित एक सतर्कता अदालत ने बुधवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और कमिश्नर एन. वासु को सबरीमाला मंदिर स्वर्ण गबन मामले में जमानत दे दी है। इस मामले में वासु मुख्य आरोपियों में से एक हैं। जाँच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश मोहित सी.एस. ने यह आदेश इस आधार पर पारित किया कि विशेष जाँच दल कानून द्वारा निर्धारित 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रहा। इसी तकनीकी आधार पर वासु डिफ़ॉल्ट बेल के हकदार बन गए।
एन. वासु इस मामले में तीसरे आरोपी हैं, जो प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के दरवाजों के फ्रेम से सोने की चोरी और हेराफेरी से संबंधित है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोने की परत चढ़े दरवाजों की मरम्मत की सिफारिश करके अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सोने की चोरी की साजिश रची थी। वासु को 11 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था और बुधवार शाम को उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया गया। इससे पहले उन्होंने उच्च न्यायालय में भी नियमित जमानत के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी।
इस मामले में अन्य मुख्य आरोपियों में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी उन्नीकृष्णन पोट्टी, बी. मुरारी बाबू और पूर्व कार्यकारी अधिकारी सुधीश कुमार शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में इसी तरह डिफ़ॉल्ट जमानत पर रिहा किया गया है। वहीं एक अन्य आरोपी एस. श्रीकुमार को नियमित जमानत मिल चुकी है। एन. वासु पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक साजिश (120बी), संपत्ति का बेईमानी से गबन (403), और विश्वासघात (409) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ए) के तहत आरोप तय किए गए हैं।
पूरा विवाद सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह और ‘द्वारपाल’ की मूर्तियों पर लगी सोने की परतों के गायब होने से जुड़ा है। आरोप है कि उन्नीकृष्णन पोट्टी के प्रायोजन में हुई मरम्मत के दौरान कई किलोग्राम सोना गायब हो गया था। बाद में अधिकारियों ने कथित तौर पर पोट्टी की बहन के घर से कुछ सोना बरामद भी किया था। केरल उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी इस मामले की जाँच कर रही है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से इसकी पड़ताल में जुटा है।