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सोमनाथ में पंद्रह हजार वोटरों को हटाने की साजिश

चुनाव आयोग के निर्देश के बाद भी जारी है धोखाघड़ी

  • सिर्फ मुसलिम मतदाताओं को निशाना

  • चुनावी गणित और विवाद की जड़

  • थोक में भरे गए यहां के फॉर्म सात

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः गुजरात की सोमनाथ विधानसभा सीट पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कोशिशों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में हुए मतदाता सत्यापन अभ्यास के दौरान, लगभग 15,663 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे गए। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन आवेदनों में मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया गया है।

सोमनाथ विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस के विमलभाई चुडासमा ने भाजपा के मानसिंह परमार को मात्र 922 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। सोमनाथ में कुल 2.6 लाख मतदाता हैं, जिनमें से स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अनुमान है कि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 50,000 से अधिक है। इतने कम जीत के अंतर वाली सीट पर 15,000 से अधिक नामों का कटना चुनावी नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग किया जाता है। नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति या बूथ स्तर का एजेंट एक दिन में सीमित संख्या में ही फॉर्म जमा कर सकता है। लेकिन सोमनाथ में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 15,663 फॉर्म केवल 269 लोगों द्वारा जमा किए गए, यानी प्रत्येक व्यक्ति ने औसतन 50 से अधिक फॉर्म भरे। दस्तावेजों की समीक्षा से पता चला कि फॉर्म में मतदाता का विवरण (नाम, मोबाइल नंबर, ईपीआईसी नंबर) अंग्रेजी में डिजिटल रूप से प्रिंटेड है, जबकि शिकायतकर्ता का विवरण गुजराती में हाथ से लिखा गया है।269 शिकायतकर्ताओं में से छह लोगों ने शपथ पत्र देकर दावा किया है कि उन्होंने ऐसे किसी फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनके नाम और पहचान पत्र का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी से ये आवेदन जमा किए गए हैं।

नाम हटाने के पीछे अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का तर्क दिया गया है। कुछ मामलों में तो “भारतीय नागरिक नहीं” होने का आधार भी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि फॉर्म जमा करने वालों में सोमनाथ भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष मंजुलाबेन सुयानी और वेरावल-पाटन के 29 भाजपा पार्षद भी शामिल हैं। विवाद बढ़ने के बाद, निर्वाचन अधिकारियों ने थोक आपत्तियों के सत्यापन के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की है। प्रशासन का कहना है कि वे मनमानी कटौती को रोकने और प्रत्येक आवेदन की भौतिक जांच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं।