कई संगठनों की असम के सीएम के खिलाफ जनहित याचिका
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मुख्यमंत्री के खिलाफ असम कांग्रेस का प्रदर्शन
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जंगल में अवैध कोयला खनन का खुलासा हुआ
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मणिपुर के उखरुल में तीस घरों में आगजनी
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है। यह याचिका माकपा नेताओं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दायर की गई है, जिसमें मुख्यमंत्री पर सोशल मीडिया और भाषणों के माध्यम से ‘हेट स्पीच’ और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया गया है। विशेष रूप से एक विवादित एनिमेटेड वीडियो का जिक्र है जिसमें मुख्यमंत्री को मुस्लिम समुदाय को लक्षित करते हुए दिखाया गया है। कोर्ट ने कहा है कि वह जल्द ही इसकी सुनवाई की तारीख तय करेगा।
वहीं, असम में राजनीतिक पारा उस समय और चढ़ गया जब असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री की संपत्तियों को लेकर दिसपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरमा के पास कथित तौर पर 12,000 बीघा जमीन है। पार्टी ने मुख्यमंत्री की पत्नी और बच्चों के नाम पर संपत्तियों की वृद्धि पर पारदर्शिता की मांग की है और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।
पर्यावरण के मोर्चे पर, एक शोध रिपोर्ट में दिहिंग पटकाई नेशनल पार्क (पूर्व का अमेज़न) के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 1996 से 2016 के बीच वन क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि खनन क्षेत्र में 129 फीसद की वृद्धि हुई है। इससे न केवल नदियों में जहरीले तत्व घुल रहे हैं, बल्कि हाथी कॉरिडोर बाधित होने से मानव-पशु संघर्ष भी बढ़ गया है।
पड़ोसी राज्य मणिपुर के उखरुल जिले में हिंसा की ताजा लहर देखी गई है, जहां उपद्रवियों ने 30 से अधिक घरों को आग लगा दी। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा, इंफाल पुलिस ने एक सरकारी अधिकारी के घर पर ग्रेनेड हमला करने के आरोप में प्रतिबंधित संगठन केसीपी-ए के तीन कैडरों को हथियारों सहित गिरफ्तार किया है।