पहली बार ऐसा देख हैरान हो रहे हैं वन्य प्राणी विशेषज्ञ
राष्ट्रीय खबर
हैदराबादः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हाल ही में देखे गए दो बाघों ने अधिकारियों और स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। महाराष्ट्र के ताडोबा टाइगर रिजर्व से 650 किमी से अधिक की दूरी तय करके एक वयस्क रॉयल बंगाल टाइगर मंगलवार रात राजामहेंद्रवरम (पूर्वी गोदावरी) के पास देखा गया। यह बाघ एक स्कूल के पास टहलता हुआ पाया गया और बाद में इसे शनिवार को कुरमापुरम गांव के खेतों से ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया। वहीं, तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी में भी एक उप-वयस्क बाघ को ट्रैक किया जा रहा है, जो संभवतः महाराष्ट्र से ही सीमा पार कर आया है।
अधिकारियों की चिंता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। राजामहेंद्रवरम में बाघ को एक निजी स्कूल के गेट और धार्मिक केंद्र के पास देखा गया। हालांकि इसने इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन यह मवेशियों का शिकार कर रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर जिला कलेक्टर ने स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी थीं। दोनों बाघ घनी आबादी वाले क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और व्यस्त सड़कों के पास देखे जा रहे हैं। गैर-वन क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी से इंसानों के साथ टकराव या शिकारियों द्वारा उन्हें मारे जाने का जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये बाघ अपना नया इलाका और साथी खोजने के लिए निकले हैं। हैदराबाद टाइगर कंजर्वेशन सोसाइटी के इमरान सिद्दीकी के अनुसार, मौजूदा टाइगर रिजर्व में पहले से ही बाघों की संख्या पर्याप्त है, इसलिए पकड़े जाने के बाद इन्हें फिर से कहाँ छोड़ा जाए, यह एक बड़ी चुनौती है। बाघ एक एकांतप्रिय और क्षेत्रीय प्राणी है। जब युवा बाघ वयस्क होते हैं, तो उन्हें शिकार और प्रजनन के लिए अपना खुद का इलाका बनाना पड़ता है। जंगलों के सिमटने के कारण, युवा बाघों को स्थापित और शक्तिशाली बाघों के साथ संघर्ष करना पड़ता है। इस लड़ाई में हारने के बाद, उन्हें सुरक्षित स्थान और साथी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। हालांकि यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक अच्छा संकेत है कि बाघ नए क्षेत्रों में विस्तार कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त निगरानी और गलियारों के अभाव में यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल, दोनों राज्यों के वन विभाग इन बाघों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर जंगलों में वापस छोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।