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अमेरिकी एजेंसियों की नजर फर्जी भारतीय दवा कंपनियों पर

दो सौ ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के तहत भारत स्थित एक आपराधिक संगठन से जुड़ी 200 से अधिक अवैध ऑनलाइन फार्मेसी वेबसाइटों को बंद कर दिया है। ऑपरेशन मेल्टडाउन के नाम से की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य नकली और जानलेवा दवाओं के अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करना है।

डीईए के अनुसार, इस भारत-आधारित ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन की जांच 2022 से चल रही थी। यह नेटवर्क कम से कम छह घातक और चार गैर-घातक ओवरडोज मामलों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। 27 जनवरी, 2026 को पूरे अमेरिका में छापेमारी की गई, जिसमें चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। डीईए-पंजीकृत फार्मेसियों के खिलाफ पांच इमीडिएट सस्पेंशन ऑर्डर जारी किए गए हैं।

ये अवैध ऑनलाइन वेबसाइटें खुद को अमेरिकी मूल की और एफडीए-अनुमोदित होने का दावा करती थीं। हालांकि, वास्तव में ये बिना किसी वैध प्रिस्क्रिप्शन के नकली गोलियां और डायवर्ट की गई दवाएं बेच रही थीं। डीईए ने पाया कि इन दवाओं में अक्सर फेंटेनल या मेथमफेटामाइन जैसे खतरनाक तत्व मिलाए जाते थे। तस्कर वैध व्यापार की आड़ में इंटरनेट का सहारा लेकर अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली का फायदा उठा रहे थे।

डीईए प्रशासक टेरेंस कोल ने स्पष्ट किया कि विदेशी तस्कर इंटरनेट के पीछे छिपकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अमेरिकी प्रशासन भारत सरकार की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है। भविष्य में भी ऐसे अवैध वितरण स्रोतों पर नकेल कसने के लिए संयुक्त अभियान जारी रहेंगे।

डीईए ने उन सैकड़ों ग्राहकों से भी संपर्क किया है जिन्होंने इन वेबसाइटों से दवाएं खरीदी थीं। एजेंसी ने नागरिकों को आगाह किया है कि केवल प्रमाणित और पंजीकृत फार्मेसियों से ही दवाएं लें, क्योंकि नकली दवाएं न केवल उपचार में अप्रभावी होती हैं, बल्कि मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं।