Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
क्या भारत में नागरिकों को हासिल है पूरी आजादी? जानिए संविधान प्रदत्त 11 अधिकारों के साथ जुड़ी अहम का... क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने क... महाराष्ट्र के सांगली में बड़ा हादसा: रेणावी घाट में दो ST बसों की आमने-सामने भीषण टक्कर स्वतंत्रता दिवस 2026: दिल्ली मेट्रो की विशेष व्यवस्था, लाल किला और जामा मस्जिद के लिए सुबह 4 बजे से ... अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, देशवासि... PM मोदी और विदेश नीति पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को घेरा,... CJI सूर्य कांत विवाद के बाद सुर्खियों में NALSAR यूनिवर्सिटी, BCI ने वापस लिया निलंबन फैसला 4,200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब 15 अगस्त को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर समारोह के दौरान मौसम पर टिकीं निगाहें

वायेजर 1 का इंटरस्टेलर स्पेस से फिर मिला संपर्क

सुदूर अंतरिक्ष से इंसान निर्मित यान हर बार चौंका रहा है

फ्लोरिडाः नासा के डीप स्पेस नेटवर्क ने पिछले 12 घंटों के भीतर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। पृथ्वी से लगभग 24 अरब किलोमीटर दूर स्थित वायेजर 1, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे दूर भेजी गई वस्तु है, ने तकनीकी खराबी के एक लंबे दौर के बाद फिर से सुसंगत और सार्थक डेटा भेजना शुरू कर दिया है।

देखें नासा का वीडियो

संकट और तकनीकी बाधा पिछले कई महीनों से वायेजर 1 का संचार तंत्र वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बन गया था। यह यान पृथ्वी पर सिग्नल तो भेज रहा था, लेकिन वे सिग्नल केवल बाइनरी कोड (0 और 1) के एक निरर्थक और अव्यवस्थित पैटर्न के रूप में थे। नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के इंजीनियरों ने गहन विश्लेषण के बाद पाया कि समस्या यान के फ्लाइट डेटा सबसिस्टम में थी। इसका काम यान के वैज्ञानिक उपकरणों से डेटा एकत्र करना और उसे पृथ्वी पर भेजने के लिए पैकेज करना है। जांच में पता चला कि इस सिस्टम की एक मेमोरी चिप खराब हो गई थी, जिसकी वजह से पूरा डेटा दूषित हो रहा था।

45 घंटे का धैर्य और इंजीनियरिंग का कौशल वायेजर 1 इतनी दूरी पर है कि वहां तक रेडियो तरंगों को पहुंचने में 22.5 घंटे लगते हैं और वहां से उत्तर वापस आने में भी उतना ही समय लगता है। यानी, एक कमांड भेजने और उसका परिणाम जानने के लिए वैज्ञानिकों को लगभग 45 घंटे तक सांसें थामकर इंतजार करना पड़ता था।

इंजीनियरों ने सीधे तौर पर चिप को बदलने के बजाय, उस खराब हिस्से को छोड़कर बाकी की मेमोरी में कोड को पुनर्व्यवस्थित करने का एक जटिल सॉफ्टवेयर पैच तैयार किया। पिछले 12 घंटों में प्राप्त नवीनतम टेलीमेट्री डेटा से यह पुष्टि हुई है कि यह कोड पैच सफलतापूर्वक इंस्टॉल हो गया है और यान ने फिर से हेल्थ रिपोर्ट और वैज्ञानिक डेटा भेजना शुरू कर दिया है।

इंटरस्टेलर स्पेस की नई जानकारियां अब यह यान अपने उपकरणों के जरिए इंटरस्टेलर स्पेस (सितारों के बीच का वह स्थान जहां सूर्य का प्रभाव खत्म हो जाता है) की प्लाज्मा लहरों, चुंबकीय क्षेत्रों और ब्रह्मांडीय किरणों की अमूल्य जानकारी साझा कर रहा है। 1977 में लॉन्च किया गया यह यान अपनी निर्धारित आयु से दशकों अधिक समय तक जीवित रहकर इंजीनियरिंग की श्रेष्ठता का प्रमाण दे रहा है।

वैज्ञानिकों को अब अटूट विश्वास है कि वायेजर 1 कम से कम 2030 तक सक्रिय रहेगा और हमें उस अंधेरे और अज्ञात ब्रह्मांड के बारे में बताता रहेगा, जहां आज तक कोई और मानवीय वस्तु नहीं पहुंच सकी है। यह सफलता केवल एक मशीन की मरम्मत नहीं, बल्कि मानव अन्वेषण की अदम्य भावना की जीत है।