Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अमेरिका ने ईरान पर नये सिरे से हमले किये मेट्रो स्टेशन की गहराई में रात बीता रहे हैं यूक्रेनी नागरिक यूक्रेन का एफ 16 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ साइनायड युक्त टमाटर खाने से पंद्रह हाथियों की मौत पुलिस चौकी पर आक्रमण में पांच अफसरों की मौत लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पास हुआ 'एंटी पेपर लीक बिल', राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून जोशीमठ के किमाणा गांव में भू-धंसाव से हड़कंप! चंडिका माता मंदिर क्षतिग्रस्त, प्राथमिक विद्यालय और पं... दिल्ली सरकार की बड़ी पहल: 'विद्या वाहिनी' योजना के तहत 1.40 लाख छात्राओं को मिलेगी मुफ्त साइकिल! CM ... 'Idiots' और 'Andhbhakts' टिप्पणी पर घिरे राहुल गांधी: अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार समिति को मामला भेज... हरियाणा मतदाता सूची पुनरीक्षण: 26.29 लाख वोटरों के रिकॉर्ड में मिलीं गड़बड़ियां, 33 लाख नाम ड्राफ्ट ...

SC का चुनाव आयोग को सख्त निर्देश: तमिलनाडु चुनाव में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट’ करें जारी, पारदर्शिता पर बड़ी जीत!

तमिलनाडु के लोगों को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा कि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट में जिन लोगों के नाम हैं, उनकी सूची ग्राम पंचायत भवन, हर उप-डिवीजन के तालुका कार्यालय और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की जाए.

सूची में शामिल लोगों को सूची प्रदर्शित होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की अनुमति होगी. सूची में विसंगति (डिस्क्रेपेंसी) का संक्षिप्त कारण भी दर्ज होगा. आपत्तियां सब-डिवीजन स्तर के कार्यालयों में दाखिल की जा सकेंगी.

लॉ एंड ऑर्डर पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, “तमिलनाडु में DGP और पुलिस कमिश्नर को यह पक्का करने का निर्देश दिया जाता है कि कोई लॉ एंड ऑर्डर की समस्या न हो और यह पक्का किया जाए कि लॉ एंड ऑर्डर अच्छी तरह से बना रहे और पूरी प्रक्रिया आसानी से हो.”

सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी में इस आदेश को तमिलनाडु पर भी लागू करने की मांग की गई थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नियम तमिलनाडु पर भी लागू होने चाहिए. सीजेआई के हवाले से कहा गया, “एक बार जब हमने बंगाल के लिए कुछ यूनिफॉर्म गाइडलाइंस बना दीं तो कोई कारण नहीं है कि उन्हें तमिलनाडु में लागू न किया जा सके. इसलिए किसी आदेश की जरूरत नहीं होगी.”

बंगाल को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) उन पिटीशनर्स में से एक है जिन्होंने कोर्ट में SIR को चैलेंज किया है. इसने तर्क दिया है कि SIR कराने का फैसला गैर-संवैधानिक है, इलेक्शन कमीशन के अधिकारों से बाहर है, और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 (ROPA) और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के खिलाफ है.

इसने तर्क दिया है कि SIR संविधान के आर्टिकल 14, 19, 21, 325 और 326 का उल्लंघन करता है और इससे असली वोटर्स को बड़े पैमाने पर वोट देने से वंचित किया जा सकता है.

इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR के लिए भी ऐसे ही निर्देश जारी किए थे, जिसमें चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल के उन 13.6 मिलियन वोटर्स की लिस्ट पब्लिश करने का निर्देश दिया गया था जिनके एन्यूमरेशन फॉर्म में लॉजिकल गड़बड़ियां हैं.