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अमेरिकी सैन्य अड्डे पर अमेरिकी गतिविधियां तेज

ग्रीनलैंड में पूर्व-नियोजित गतिविधियों के लिए पहुंचे सैन्य विमान

न्यूयार्कः उत्तर अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड ने सोमवार को घोषणा की है कि उसके सैन्य विमान जल्द ही ग्रीनलैंड स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पहुंचेंगे। यह संगठन अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य उपक्रम है, जो एयरोस्पेस निगरानी और रक्षा के लिए जिम्मेदार है। हालांकि नोराड ने इन गतिविधियों को लंबे समय से नियोजित और रक्षा सहयोग का हिस्सा बताया है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताओं को जन्म दे दिया है।

यह सैन्य हलचल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे किसी भी तरह से ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करना चाहते हैं। उनके इस बयान ने अमेरिका के ट्रांसअटलांटिक सहयोगियों, विशेष रूप से यूरोपीय देशों के बीच भारी बेचैनी पैदा कर दी है।

पिटुफ़िक स्पेस बेस पर होने वाली इन गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन नोराड का कहना है कि यह अभियान अमेरिका और कनाडा के बीच स्थायी रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस संबंध में डेनमार्क के साथ समन्वय किया गया है और ग्रीनलैंड प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है।

सप्ताहांत में तनाव उस समय और बढ़ गया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने उन देशों के खिलाफ नए टैरिफ (शुल्क) लगाने की धमकी दी जो आर्कटिक द्वीप को लेकर उनकी योजनाओं का विरोध कर रहे हैं। यह धमकी तब आई जब कई यूरोपीय देशों ने एक युद्धाभ्यास के लिए ग्रीनलैंड में छोटे सैन्य प्रतिनिधिमंडल भेजे थे। हालांकि इस अभ्यास में अमेरिका को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे अपनी संप्रभुता संबंधी महत्वाकांक्षाओं में हस्तक्षेप के रूप में देखा।

नोराड ने अपने बचाव में कहा है कि वह उत्तरी अमेरिका की रक्षा के लिए नियमित रूप से इस तरह के निरंतर और विस्तृत अभियान चलाता रहता है। ग्रीनलैंड पहुँचने वाले विमान महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बेस से संचालित विमानों के साथ मिलकर काम करेंगे।

ग्रीनलैंड अपनी रणनीतिक स्थिति और खनिज संसाधनों के कारण हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन 2026 की शुरुआत में यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच टकराव का मुख्य केंद्र बन गया है। सैन्य विमानों का आगमन यह दर्शाता है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य रूप से भी और अधिक मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है।