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सुकमा में खत्म हुआ खौफ का दौर! अब बंदूकों की जगह गूंज रही स्कूलों की घंटियां, नक्सल प्रभावित इलाकों में लौट रही शिक्षा की रौनक

सुकमा: बस्तर के नक्सल प्रभावित जिलों की तस्वीर अब तेजी से बदलनी शुरू हो चुकी है. जिन स्कूलों में पहले सन्नाटा पसरा रहता था, वहां अब स्कूली बच्चों की आवाज गूंजने लगी है. सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि बंद पड़े स्कूलों में शिक्षक भी पढ़ाने लगे हैं.

बदल रही नक्सलगढ़ की तस्वीर

अर्जुन नाम के एक स्थानीय शिक्षक ने इस बदलाव पर खुशी जताते हुए कहा कि अब छात्र बिना किसी डर के स्कूल आते हैं. उन्होंने कहा, “पहले लोग यहां आने से डरते थे, और कोई सुविधा नहीं थी. अब जब स्कूल खुल गया है, तो बच्चे पढ़ने आ रहे हैं. वे अच्छी पढ़ाई करके अपने माता-पिता और इलाके का नाम रोशन करना चाहते हैं.” एक छात्र ने कहा, “मुझे शिक्षा पाकर बहुत खुशी हो रही है.”

बंद पड़े स्कूलों आश्रमों को खोला जा रहा

बस्तर IG पी. सुंदरराज ने पुष्टि की कि प्रशासन उन स्कूलों और आश्रमों को फिर से शुरू करने पर काम कर रहा है, जिन्हें पहले नक्सलियों ने योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया था. “पहले, बस्तर डिवीजन में सैकड़ों स्कूलों और आश्रमों को नक्सलियों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत नष्ट कर दिया था. जिन इलाकों में माओवादियों ने ऐसी नकारात्मक गतिविधियां की थीं, वहां नए सुरक्षा कैंप स्थापित होने के बाद, अब जनता को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों जैसी सभी बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है.

गोली की आवाज पर भारी पड़ी स्कूलों की घंटियां

बस्तर आईजी सुंदरराज पी कहते हैं कि जहां पहले IED विस्फोटों और गोलियों की आवाजें सुनाई देती थी, अब स्कूल की घंटियों की आवाज सुनाई देती है. आने वाले समय में, स्थानीय प्रशासन के समन्वय से, सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार अन्य सभी बुनियादी जरूरतें भी पूरी की जाएंगी.

पुलिस कैंप खुलने से शांति का माहौल बना

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि सुकमा के विभिन्न दूरदराज के स्थानों पर कैंप स्थापित करने के बाद, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र और PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) जैसी बुनियादी सुविधाएं चलाई जा रही हैं. “आसपास के इलाकों के बच्चे भी रायगुड़ा के स्कूल में आ रहे हैं. रायगुड़ा में कैंप दिसंबर 2024 में स्थापित किया गया था. कैंप स्थापित होने के बाद, उस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान चलाए गए, और अब वहां की स्थिति में काफी बदलाव आया है.”

ग्रामीण शासकीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहते हैं

सुकमा एसपी कहते हैं कि ग्रामीण अब सरकार से जुड़ना चाहते हैं. वहां नियद नेल्लानार योजना भी शुरू की गई है, जिसके तहत आधार कार्ड और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. ग्रामीण बहुत खुश हैं, और सरकार अब ग्रामीणों से बेहतर तरीके से जुड़ पा रही है. गांव की रहने वाली, मांडवी सनवैया ने कहा, “हमारे गांव में कोई स्कूल नहीं था, लेकिन हम चाहते थे कि हमारे बच्चे पढ़ें-लिखें और ज़िंदगी में आगे बढ़ें, ताकि वे अपने माता-पिता को गर्व महसूस करा सकें.”

महिला ग्रामीण ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या के कारण बच्चे पढ़ नहीं पाते थे, और एक गांव के लोग दूसरे गांव में नहीं जा पाते थे. “अब जब CRPF कैंप बन गया है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है. हम आज़ादी से सांस ले सकते हैं, और हमारे आने-जाने पर कोई रोक नहीं है.” “मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं, और मेरी कुछ गुज़ारिश भी है कि हमें एक स्कूल की बिल्डिंग, एक आंगनवाड़ी सेंटर और एक अस्पताल चाहिए. सोलर पैनल लगाए गए हैं, और बिजली की लाइनें बिछाई गई हैं; कृपया जल्द ही बिजली दें”.