Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पटना में 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर हंगामा: छात्रों ने तोड़े बैरिकेड्स, सीएम आवास घेराव... रायपुर में रक्षाबंधन की भीड़ से पहले जेवर चुराने वाली 2 शातिर महिलाएं गिरफ्तार: ₹12 लाख के सोने-चांद... खैरागढ़ में नवविवाहिता आत्महत्या कांड: दहेज में बाइक-पैसे की मांग और पढ़ाई छुड़ाने वाला पति गिरफ्तार खैरागढ़ में नवविवाहिता आत्महत्या कांड: दहेज में बाइक-पैसे की मांग और पढ़ाई छुड़ाने वाला पति गिरफ्तार बीजापुर में भारी बारिश से उफान पर चिंतावागु नदी: नगर सेना ने बोट से सुरक्षित पार कराई नदी, मरीजों को... कोरबा के देवपहरी वाटरफॉल में रातभर चट्टान पर फंसे रहे 3 दोस्त: 15 घंटे बाद SDRF ने बोट और रस्सी से क... शिक्षक (कृषि) भर्ती में B.Ed. अनिवार्य: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की योग्यता में छूट की मांग, 65 अ... नवा रायपुर सेक्टर-12 में बनेगी 120 करोड़ की आवासीय परियोजना: 29 एकड़ में तैयार होंगे 348 HIG और MIG ... रायपुर में ई-बसों के नए रूट पर फैसला: स्कूल-अस्पताल भी जुड़ेंगे; PMAY आवासों के लिए 30 सितंबर की डेड... छत्तीसगढ़ में ड्रॉपआउट बच्चों के लिए 'लइका चिन्हारी' ऐप: घर-घर डिजिटल सर्वे से स्कूलों में दोबारा मि...

पैतालिस दिनों के अभियान को लेकर मैदान में उतरेगी कांग्रेस

कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मनरेगा बचाओ संग्राम नाम के इस 45 दिवसीय अभियान की शुरुआत शनिवार को देश के विभिन्न हिस्सों में जिला स्तरीय प्रेस वार्ताओं के साथ हुई।

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए वीबी जी राम जी बिल का पुरजोर विरोध करना और मनरेगा को उसके पुराने, अधिकार-आधारित स्वरूप में वापस लाना है। कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून न केवल पंचायतों की शक्तियों को कम करता है, बल्कि ग्रामीणों के काम के अधिकार पर भी सीधा प्रहार है।

पार्टी के रणनीतिकार और महासचिव जयराम रमेश ने डिजिटल माध्यम से सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी प्रशासन ने मनरेगा की मूल संरचना को ध्वस्त कर गरीबों की आजीविका छीनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस तब तक शांत नहीं बैठेगी जब तक जवाबदेही और रोजगार की गारंटी बहाल नहीं हो जाती। आंदोलन की रूपरेखा अत्यंत विस्तृत है; 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों पर उपवास के माध्यम से विरोध जताया जाएगा, जिसके बाद 12 से 29 जनवरी के बीच ग्राम चौपाल लगाकर जन-जन को इस कानून के खतरों से अवगत कराया जाएगा।

आंदोलन का अगला चरण और भी आक्रामक होगा, जिसमें 30 जनवरी को शांतिपूर्ण धरना और फरवरी के मध्य में राज्यों की विधानसभाओं का घेराव शामिल है। इस अभियान का समापन फरवरी के अंत में चार विशाल रैलियों के साथ होगा। कांग्रेस ने इस आंदोलन की तुलना ऐतिहासिक कृषि कानूनों के खिलाफ हुए संघर्ष से की है। हालांकि, पार्टी का कहना है कि जहां किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं तक सीमित था, वहीं मनरेगा बचाओ संग्राम देश की हर पंचायत और ब्लॉक तक पहुँचेगा, जिससे यह एक विकेंद्रीकृत जन-आंदोलन बनेगा।