कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मनरेगा बचाओ संग्राम नाम के इस 45 दिवसीय अभियान की शुरुआत शनिवार को देश के विभिन्न हिस्सों में जिला स्तरीय प्रेस वार्ताओं के साथ हुई।
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए वीबी जी राम जी बिल का पुरजोर विरोध करना और मनरेगा को उसके पुराने, अधिकार-आधारित स्वरूप में वापस लाना है। कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून न केवल पंचायतों की शक्तियों को कम करता है, बल्कि ग्रामीणों के काम के अधिकार पर भी सीधा प्रहार है।
पार्टी के रणनीतिकार और महासचिव जयराम रमेश ने डिजिटल माध्यम से सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी प्रशासन ने मनरेगा की मूल संरचना को ध्वस्त कर गरीबों की आजीविका छीनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस तब तक शांत नहीं बैठेगी जब तक जवाबदेही और रोजगार की गारंटी बहाल नहीं हो जाती। आंदोलन की रूपरेखा अत्यंत विस्तृत है; 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों पर उपवास के माध्यम से विरोध जताया जाएगा, जिसके बाद 12 से 29 जनवरी के बीच ग्राम चौपाल लगाकर जन-जन को इस कानून के खतरों से अवगत कराया जाएगा।
आंदोलन का अगला चरण और भी आक्रामक होगा, जिसमें 30 जनवरी को शांतिपूर्ण धरना और फरवरी के मध्य में राज्यों की विधानसभाओं का घेराव शामिल है। इस अभियान का समापन फरवरी के अंत में चार विशाल रैलियों के साथ होगा। कांग्रेस ने इस आंदोलन की तुलना ऐतिहासिक कृषि कानूनों के खिलाफ हुए संघर्ष से की है। हालांकि, पार्टी का कहना है कि जहां किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं तक सीमित था, वहीं मनरेगा बचाओ संग्राम देश की हर पंचायत और ब्लॉक तक पहुँचेगा, जिससे यह एक विकेंद्रीकृत जन-आंदोलन बनेगा।