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जमानत खारिज होने के बाद उमर के पिता का बयान आया

कासिम इलियास ने जांच की मांग उठाई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई विवादास्पद नारेबाजी के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। यह विवाद तब गहराया जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस पृष्ठभूमि में उमर खालिद के पिता और राजनीतिक कार्यकर्ता कासिम इलियास ने सामने आकर एक संतुलित जांच की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अक्सर विरोध प्रदर्शनों में कुछ बाहरी तत्व अराजकता फैलाने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए घुसपैठ करते हैं।

इलियास ने जोर देकर कहा कि जेएनयू में होने वाले प्रदर्शन सदैव संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अदालतों के हालिया फैसलों के आधार पर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचला गया, तो यह लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय होगा। उनका तर्क है कि अगर केवल विरोध के आयोजन मात्र से आयोजकों को दोषी मान लिया जाएगा, तो भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल के लिए रैली या जुलूस निकालना असंभव हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वे नारों की निष्पक्ष जांच करें और केवल दोषियों पर ही कार्रवाई करें, न कि पूरे छात्र समुदाय को निशाना बनाएं।

कासिम इलियास ने जेल में बंद अपने बेटे उमर खालिद के हवाले से बताया कि वह अपने साथियों को जमानत मिलने पर खुश है, लेकिन अपनी लंबी न्यायिक लड़ाई को लेकर उसने संतोष और धैर्य का परिचय दिया है। फिलहाल जेएनयू परिसर में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस नारेबाजी के वीडियो साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। यह मामला एक बार फिर अकादमिक संस्थानों में वैचारिक स्वतंत्रता और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के बीच की महीन लकीर पर बहस छेड़ चुका है।