भारत सरकार की चुप्पी के बाद भी सैटेलाइट फोटो से पुष्टि
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः हाल ही में प्राप्त उच्च-रिजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी ने पूर्वी लद्दाख के विवादित पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) क्षेत्र में चीन की खतरनाक सैन्य तैयारियों की एक स्पष्ट तस्वीर पेश की है। अंतरिक्ष खुफिया फर्म वेंटोर (Ventor) द्वारा 28 दिसंबर, 2025 को जारी की गई तस्वीरों से पता चलता है कि चीन न केवल इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है, बल्कि उसे स्थायी रूप में तब्दील कर रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, सिरिजाप पोस्ट के करीब एक विशाल और आधुनिक परिसर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। झील के किनारे से महज कुछ मीटर की दूरी पर कई स्थायी कंक्रीट की संरचनाएं उभर आई हैं। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को वर्तमान बफर जोन के बेहद करीब ले आता है। इन नए ढांचों की मदद से चीन इस दुर्गम क्षेत्र में भारी मात्रा में सैन्य संसाधन, रसद और अधिक सैनिकों को तैनात करने में सक्षम हो जाएगा।
भू-स्थानिक शोधकर्ताओं और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण चीन की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। चीन अब केवल गश्त तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विवादित क्षेत्रों में स्थायी बुनियादी ढांचा बनाकर अपनी उपस्थिति को वास्तविक नियंत्रण में बदलना चाहता है।
वर्ष 2025 के उत्तरार्ध में इस निर्माण की गति में अचानक आई तेजी यह दर्शाती है कि चीन प्रतिकूल मौसम (सर्दियों) में भी अपनी सैन्य अभियान क्षमता को बनाए रखना चाहता है। ये संरचनाएं सैनिकों को कड़ाके की ठंड से सुरक्षा प्रदान करेंगी, जिससे वे साल भर मोर्चे पर डटे रह सकेंगे। यह घटनाक्रम भारत और चीन के बीच चल रहे राजनयिक प्रयासों के विरोधाभासी है।
2024 में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने, सैनिकों की वापसी और सीधी उड़ानें शुरू करने जैसे सकारात्मक कदम उठाए गए थे। हालांकि, पैंगोंग त्सो में निरंतर हो रहा यह निर्माण चीन के दीर्घकालिक इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह संकेत देता है कि चीन एक तरफ बातचीत की मेज पर शांति का प्रदर्शन कर रहा है, तो दूसरी तरफ जमीन पर अपनी स्थिति को अभेद्य बना रहा है।
फिलहाल, भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की ओर से इन ताजा तस्वीरों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता में उसके प्रभाव को बढ़ाएगा। भारत के लिए यह न केवल क्षेत्रीय संप्रभुता का मुद्दा है, बल्कि लद्दाख क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने की चेतावनी भी है।