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आठ लोगों के करोड़ों की संपत्ति जब्त की गयी

भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में गाड़ी आगे बढ़ी

  • मुखिया सरपंच भी चपेट में आये

  • सभी संपत्तियां राज्यसात की गयी

  • कोठियां, जमीन और अन्य संपत्ति जब्त

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही मुहिम अब एक निर्णायक चरण में पहुँच गई है, जहाँ भ्रष्ट अधिकारियों के लिए न केवल जेल का रास्ता खुला है, बल्कि उनकी अवैध रूप से अर्जित काली कमाई को भी अब सरकारी खजाने में जमा किया जा रहा है। राज्य की निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने हाल ही में आठ बड़े भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लगभग 4.14 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को राज्यसात करने का ठोस प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इस कार्रवाई की मंजूरी मिलते ही इन अफसरों की आलीशान कोठियाँ, जमीन और अन्य संपत्तियाँ अब बिहार सरकार की मिल्कियत हो जाएंगी।

इस अभियान के केंद्र में निगरानी विभाग के महानिदेशक और 1993 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी जितेंद्र सिंह गंगवार हैं। एडीजी मुख्यालय के बाद निगरानी प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। गंगवार की रणनीति केवल भ्रष्टाचारियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस धन को वापस लाने की है जो जनता के हक का था। विभाग के अनुसार, वर्तमान में 119 मामलों में कुल 96.76 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जिनमें से 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही अंतिम रूप से सरकार के नाम हो चुकी है।

ताजा कार्रवाई के दायरे में आए नामों में सबसे ऊपर पश्चिम चंपारण के लौरिया प्रखंड की राजमारहिया पकड़ी पंचायत के पूर्व मुखिया मैनेजर यादव हैं, जिनकी 80.04 लाख रुपये की संपत्ति अवैध पाई गई है। वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग के बर्खास्त अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी की 90.75 लाख रुपये की संपत्ति भी जब्ती की सूची में शामिल है। इसके अतिरिक्त, लखीसराय के तत्कालीन वन परिक्षेत्र पदाधिकारी दिलीप कुमार (88.25 लाख), गोपालगंज के पूर्व एसडीओ विजय प्रताप सिंह (62.35 लाख) और दरभंगा के पूर्व न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय (41.12 लाख) की संपत्तियों पर भी सरकारी कब्जा होने जा रहा है।

निगरानी विभाग की इस सूची में मोतिहारी के टैक्स दारोगा अजय कुमार गुप्ता, पटना ग्रामीण की सीडीपीओ फूलपरी देवी और समस्तीपुर के एक मुखिया का नाम भी शामिल है। राज्य सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार से बरामद इस धन का उपयोग अब सार्वजनिक सेवाओं जैसे सड़क, स्कूल और अस्पतालों के निर्माण में किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश सरकार ने गंगवार जैसे सख्त अफसरों को पूरी छूट देकर सिस्टम बदलने की मंशा स्पष्ट कर दी है। जनता के बीच इस कार्रवाई को एक बड़े इंसाफ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचारियों में खौफ पैदा हुआ है और आम लोगों में न्याय की नई उम्मीद जागी है।