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वेनेजुएल में घुसकर मादुरो को उठा लाने पर खेमाबंदी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीखी बहस

  • खेमों में बंट गये हैं सदस्य देश

  • अमेरिकी कार्रवाई का जोरदार विरोध

  • रूस ने कहा अमेरिकी अराजकता है

संयुक्त राष्ट्रः वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिकी विशेष बलों द्वारा चलाए गए एक दुस्साहसी सैन्य अभियान ने वैश्विक स्तर पर राजनयिक और कानूनी हलचल पैदा कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद सोमवार, 5 जनवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें दुनिया भर के देशों ने अमेरिकी कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अभियान पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। गुटेरेस ने कहा कि राष्ट्रों के बीच संबंधों में सीमाओं की अनुल्लंघनीयता सर्वोपरि है और इस तरह की गंभीर कार्रवाई भविष्य के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकती है।

सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका के सहयोगियों और विरोधियों, दोनों ने ही इस हस्तक्षेप की आलोचना की। रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने इसे अमेरिका द्वारा अराजकता के युग की वापसी करार दिया। वहीं, डेनमार्क (जो नाटो का सदस्य है) और कोलंबिया ने भी संप्रभुता के उल्लंघन पर सवाल उठाए। कोलंबियाई राजदूत लियोनोर ज़लाबटा ने कहा कि यह छापेमारी हमारे क्षेत्र में अतीत के सबसे बुरे हस्तक्षेपों की याद दिलाती है और लोकतंत्र की रक्षा हिंसा या जबरदस्ती के माध्यम से नहीं की जा सकती।

दूसरी ओर, अमेरिकी दूत और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने इस सैन्य कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने इसे एक सर्जिकल लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशन (सटीक कानून प्रवर्तन अभियान) बताया। वाल्ट्ज ने 15 सदस्यीय परिषद की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि मादुरो एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं, बल्कि एक अवैध नार्को-आतंकवादी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसे व्यक्ति को वैधता कैसे दे सकता है जो अंतरराष्ट्रीय नार्को-आतंकवाद की साजिश में शामिल है।

पूरा घटनाक्रम शनिवार, 3 जनवरी को शुरू हुआ जब अमेरिकी सेना ने एक गुप्त अभियान में मादुरो और उनकी पत्नी को एक सैन्य अड्डे पर स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया। उन्हें तुरंत एक अमेरिकी युद्धपोत पर सवार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहाँ अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद से संबंधित साजिश रचने का आरोप लगाया है।

सोमवार को मादुरो मैनहट्टन की एक अदालत में पहली बार पेश हुए। इस पूरी घटना ने न केवल वेनेजुएला की राजनीति को अस्थिर कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय संप्रभुता और विदेशी धरती पर कानून प्रवर्तन के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप की सीमाओं पर एक नई और जटिल वैश्विक बहस को जन्म दे दिया है।