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मंत्री के निजी पीए के ठिकानों पर बड़ी छापामारी

कर्नाटक में भ्रष्टाचार के विरुद्ध राज्य के लोकायुक्त का बड़ा एक्शन

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने कैबिनेट मंत्री बी.जेड. जमीर अहमद खान के निजी सचिव, सरदार सरफराज खान के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों के तहत हुई इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बुधवार तड़के शुरू हुई इस छापेमारी में लोकायुक्त के 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने एक साथ 13 अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी।

आय से अधिक संपत्ति का विशाल भंडार लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच और छापेमारी के दौरान लगभग 14.38 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरफराज खान के पास से 8.44 करोड़ रुपये मूल्य के आलीशान रिहायशी मकान और लगभग 37 एकड़ की विस्तृत कृषि भूमि के दस्तावेज बरामद हुए हैं।

इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने उनके ठिकानों से 1.64 करोड़ रुपये मूल्य के लग्जरी वाहन, 1.29 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि (FD), 2.99 लाख रुपये के सोने के आभूषण और 66,500 रुपये की नगदी जब्त की है। सरफराज खान, जो मूल रूप से सहकारिता निदेशालय में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, वर्तमान में आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में प्रतिनियुक्ति पर सचिव के रूप में कार्यरत थे।

मंत्री जमीर अहमद का रसूख और राजनीतिक प्रभाव इस कार्रवाई की आंच सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री जमीर अहमद खान तक पहुँचती दिख रही है, क्योंकि सरफराज उनके सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं। जमीर अहमद खान कर्नाटक कांग्रेस के एक कद्दावर नेता हैं और वर्तमान में चामराजपेट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है; उन्होंने 2005 में जनता दल (सेक्युलर) के टिकट पर दिग्गज नेता एस.एम. कृष्णा के करीबी को हराकर अपनी पहचान बनाई थी। बाद में 2018 में वे जेडीएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। वे पूर्व में हज और वक्फ बोर्ड के मंत्री भी रह चुके हैं।

सरकार की छवि पर संकट भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों ने सिद्धारमैया सरकार की साफ-सुथरी छवि के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर है, वहीं लोकायुक्त अब उन बेनामी निवेशों और बैंक ट्रांजेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रहा है, जो सरफराज खान के आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक प्रतीत होते हैं। यह छापेमारी राज्य में सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चल रही बड़ी मुहीम का हिस्सा मानी जा रही है।