राजनीतिक दलों की वित्तीय रिपोर्ट 2024-25 मे खुलासा
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प्रचार पर भारी व्यय कर रही भाजपा
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विपक्षी दलों की वित्तीय चुनौतियां
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भाजपा की जेब में छह हजार करोड़
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग को सौंपी गई राजनीतिक दलों की वार्षिक ऑडिट और अंशदान रिपोर्ट ने देश के चुनावी अर्थशास्त्र की एक विस्तृत तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2024-25 की यह रिपोर्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में 18वीं लोकसभा के आम चुनाव संपन्न हुए थे। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहाँ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खजाने में भारी वृद्धि हुई है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कई प्रभावशाली क्षेत्रीय दलों को वित्तीय मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है।
भाजपा और कांग्रेस का तुलनात्मक अंतर रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को इस वित्त वर्ष में कुल 6,088 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है। पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में यह राशि 3,967 करोड़ रुपये थी, जिसका अर्थ है कि पार्टी ने एक साल में 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। इसके विपरीत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आय में भारी गिरावट देखी गई। कांग्रेस का चंदा 1,129.66 करोड़ रुपये से गिरकर मात्र 522.13 करोड़ रुपये रह गया। वर्तमान में भाजपा को मिलने वाला चंदा कांग्रेस की तुलना में लगभग 12 गुना अधिक है, जो चुनावी प्रतिस्पर्धा के बीच संसाधनों के बड़े अंतर को दर्शाता है।
व्यक्तिगत दान और सांगठनिक खर्च कांग्रेस की रिपोर्ट में दिलचस्प व्यक्तिगत योगदान भी शामिल हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने पार्टी को 2.30 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का दान दिया, जबकि वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने 3 करोड़ रुपये का बड़ा योगदान दिया। खर्च की बात करें तो कांग्रेस ने कुल 1,111.94 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से 896.22 करोड़ रुपये चुनाव प्रचार में लगे। इसमें चार्टर्ड विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए 147.2 करोड़ रुपये और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार के लिए 451.27 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
क्षेत्रीय दलों की स्थिति और छोटे दलों का उदय विपक्ष के अन्य प्रमुख घटक भी वित्तीय मंदी से अछूते नहीं रहे। तृणमूल कांग्रेस का चंदा 646 करोड़ से घटकर 184 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस और बीजद ने भी अपनी आय में कमी दर्ज की। हालांकि, कुछ छोटे दलों ने सकारात्मक रुझान दिखाया। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के चंदे में वृद्धि हुई, जिसमें जानी-मानी लेखिका अरुंधति रॉय द्वारा दिया गया एक लाख रुपये का दान भी शामिल है। यह डेटा स्पष्ट करता है कि चुनावी राजनीति में धनबल का झुकाव फिलहाल सत्ता पक्ष की ओर काफी अधिक है।