आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली मॉडल को लागू किया
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़: पंजाब की शिक्षा प्रणाली को भविष्योन्मुखी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में मान सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित करियर गाइडेंस कार्यक्रम की शुरुआत की है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पायलट चरण का उद्घाटन करते हुए राज्य के विभिन्न सरकारी और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में 25 एआई-सक्षम करियर गाइडेंस लैब राष्ट्र को समर्पित कीं।
सटीक और व्यक्तिगत करियर योजना इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनके करियर के बारे में सूचित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। इस परियोजना के कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र एआई-आधारित एप्टीट्यूड और इंटरेस्ट असेसमेंट (योग्यता और रुचि परीक्षण) से गुजरेंगे।
यह आधुनिक प्रणाली प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत क्षमताओं का विश्लेषण कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके आधार पर पेशेवर काउंसलर छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ वन-टू-वन सत्र करेंगे ताकि उनकी रुचियों को एक ठोस करियर योजना में बदला जा सके।
शिक्षा का लोकतांत्रिकरण शिक्षा मंत्री बैंस ने इस अवसर पर कहा कि करियर गाइडेंस अब केवल अमीर या निजी स्कूलों के बच्चों के लिए विलासिता नहीं रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर बच्चा, चाहे उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, अपने भविष्य के बारे में वैज्ञानिक डेटा के आधार पर सही चुनाव कर सके। यह कार्यक्रम कक्षा 6 से ही शुरू हो जाएगा, जिससे बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही अपनी जन्मजात प्रतिभा को पहचानने का मौका मिलेगा। यह पहल एड-टेक पार्टनर बियॉन्ड मेंटर के सहयोग से पूरी तरह नि:शुल्क प्रदान की जा रही है।
अंकों की दौड़ से आगे की सोच पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षा को केवल अंकों की दौड़ से हटाकर होलिस्टिक डेवलपमेंट (समग्र विकास) की ओर ले जाया जाए। ये लैब छात्रों को उनकी ताकत समझाने में मदद करेंगी। इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों और छात्रों पर इसके प्रभाव की बारीकी से निगरानी की जाएगी। यदि यह सफल रहता है, तो पंजाब इस तरह की एआई-आधारित व्यवस्था को अपने पूरे सार्वजनिक शिक्षा ढांचे में लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जो 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करेगा।