डोनाल्ड ट्रंप के कठोर रवैये की अंतर्राष्ट्रीय आलोचना
वाशिंगटनः अमेरिका के विदेश विभाग द्वारा 85,000 वीज़ा रद्द करने के कथित मामले ने ट्रंप प्रशासन की कठोर आव्रजन नीतियों को एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। यह बड़ी कार्रवाई मुख्य रूप से 2017 से 2021 के बीच की गई थी और उन हजारों लोगों को लक्षित करती थी जिनके वीज़ा को सुरक्षा चिंताओं, सार्वजनिक शुल्क नियमों के उल्लंघन, या अन्य प्रशासनिक खामियों के आधार पर रद्द किया गया था। सार्वजनिक शुल्क नियम एक विवादास्पद नीति थी, जिसके तहत अधिकारियों को यह तय करने का अधिकार था कि क्या कोई अप्रवासी भविष्य में सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर निर्भर हो सकता है, जिससे कानूनी आव्रजन का मार्ग संकीर्ण हो गया था।
इस बड़े पैमाने पर वीज़ा रद्द होने का सीधा और विनाशकारी असर हज़ारों परिवारों, अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पेशेवर कर्मचारियों पर पड़ा है। रातोंरात, अमेरिका में रहने और काम करने की उनकी कानूनी स्थिति अनिश्चित हो गई, जिससे कई लोग वापस अपने देश लौटने पर मजबूर हुए या जटिल कानूनी लड़ाई में उलझ गए।
आलोचकों और मानवाधिकार समूहों का तर्क है कि यह बड़े पैमाने पर वीज़ा रद्दीकरण एक राजनीतिक कदम था। उनका मानना है कि इसका वास्तविक उद्देश्य कानूनी आव्रजन को हतोत्साहित करना और अमेरिका के दरवाजे मध्य-पूर्वी, अफ्रीकी और मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के लिए बंद करना था। इस वीज़ा रद्द करने की नीति ने विशेष रूप से इन समुदायों को प्रभावित किया, जिससे अमेरिका की बहुसांस्कृतिक छवि को आघात पहुँचा।
इसके विपरीत, पूर्व प्रशासन के समर्थकों ने इस कदम का बचाव राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक बताया। उनका तर्क था कि यह नीति केवल उन लोगों को बाहर करने के लिए थी जो अमेरिका में सुरक्षित रूप से रहने के मानकों को पूरा नहीं करते थे या जो देश की वित्तीय प्रणाली पर बोझ बन सकते थे।
वर्तमान प्रशासन अब इस मामले की गहन समीक्षा कर रहा है, और प्रभावित लोग अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक रद्दीकरण के दीर्घकालिक राजनयिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। इस पूरे मुद्दे ने वीज़ा आवेदनों और उनके रद्द होने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण की मांग को भी जन्म दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की मनमानी कार्रवाई को रोका जा सके।