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छत्तीसगढ़ में धान किसान ने जान देने की कोशिश की, टोकन नहीं मिलने से था परेशान, विपक्ष ने बताया सरकार के लिए शर्मनाक

महासमुंद: धान का टोकन नहीं कटने से नाराज किसान ने बागबाहरा में जान देने की कोशिश की. गंभीर हालत में किसान को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जान देने की कोशिश करने वाले किसान का नाम मनबोध गाड़ा बताया जा रहा है. साथी किसानों का कहना है कि मनबोध पिछले कई दिनों से टोकन कटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका टोकन नहीं कट पा रहा था.

मेडिकल कॉलेज में चल रहा किसान का इलाज

घटना के वक्त मौके पर मौजूद लोगों ने डायल 112 को सूचना दी. लोगों की मदद से आनन फानन में किसान को पहले पहले प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. वहां से उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. पीड़ित किसान के बेटे ने भी कहा कि उसके पिताजी टोकन कटाने के लिए बीते तीन दिनों से परेशान चल रहे थे. जिला कांग्रेस ने भी घटना के लिए अफसरों और सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं जिला प्रशासन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि हम पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं.

कांग्रेस ने घटना पर उठाए सियासी सवाल

किसान की जान देने की कोशिश पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साय सरकार पर तंज कसा. बघेल ने कहा कि किसानों की तकलीफ को लेकर सरकार चुप्पी साधे हुए है. किसान अपने खून पसीने से उपजाए धान को बेचने के लिए दर दर भटक रहा है. पूर्व सीएम भपेश बघेल ने कहा कि किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से टोकन नहीं ले पा रहे हैं. कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी की जो व्यवस्था है वो किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर रही है. किसान ने इतना घातक कदम उठाया उसपर दो शब्द बोलने के लिए भी सरकार के मंत्री तैयार नहीं हैं. बघेल ने कहा कि ये किसानों का अपमान है, शासन की ये चुप्पी सामान्य चुप्पी नहीं बल्कि आपराधिक चुप्पी है.

धान खरीदी में बारदाने की कमी है, तौल में गड़बड़ी है, वजन कम आ रहा है. प्रदेश भर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों में किसान अपना टोकन नहीं कटा पा रहे हैं. लिमिट भी कम कर दिया गया है. महासमुंद के बागबाहरा के किसान मनबोध गाड़ा लगातार च्वाइस सेंटर में टोकन कटाने के लिए जाते रहे. ऑफलाइन जाकर भी समिति के चक्कर लगाते रहे लेकिन उनका टोकन नहीं कटा और आहत होकर उन्होंने जान देने की कोशिश की, जो बेहद पीड़ादायक है: भूपेश बघेल, पूर्व सीएम

कौन है पीड़ित किसान मनबोध गाड़ा

65 साल के किसान मनबोध गाड़ा महासमुंद के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम सेनभाठा के रहने वाले हैं. मनबोध गाड़ा के पास कुल 1 एकड़ 40 डिसमिल जमीन है, जिसपर उसने धान की फसल लगाई. परिवार वालों के मुताबिक मनबोध तीन दिनों से लगातार च्वाइस सेंटर में टोकन कटाने के लिए जा रहे थे. लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से उनका टोकन नहीं कट पा रहा था. शनिवार को जब टोकन नहीं कटा तो किसान मनबोध ने अपने पास रखे धारदार चीज से अपने गले पर वार कर लिया. फिलहाल मेडिकल कॉलेज से भी किसान मनबोध को रेफर कर रायपुर मेकाहारा भेजा गया है.

ये बहुत गंभीर मामला है. धान खरीदी में लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं. जिला प्रशासन को चाहिए कि वो दोषियों की तलाश कर उनपर सख्त से सख्त कार्रवाई करे. प्रदेश में आसानी से अवैध शराब और गांजा तो बिक रहा है लेकिन किसानों का धान नहीं बिक रहा है. हम किसानों के मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं. किसान को न्याय मिलना चाहिए. पीड़ित किसान को आर्थिक मदद भी मिलनी चाहिए. हम रायपुर जाकर किसान से मुलाकात करेंगे: द्वारिकाधीश यादव, कांग्रेस नेता, खल्लारी

मेरे पिताजी टोकन नहीं मिलने से काफी परेशान चल रहे थे. जब टोकन नहीं कटा तो उन्होने खेत में जाकर अपने गले पर वार कर लिया. गंभीर हालत में हमलोग उनको लेकर यहां आए हैं. हमारे पास कुल 1 एकड़ 40 डिसमिल ही जमीन है: शंकर, किसान का बेटा

सेनभाठा के किसान मनबोध ने टोकन नहीं कटने से नाराज होकर जान देने की कोशिश की है, ऐसी खबर हमें मिली है. मनबोध का खेमडा सोसाइटी में एक एकड़ का पंजीयन है. किसान सोसायटी में टोकन कटवाने नही गया था. जांच के बाद ही सारे कारणों का पता चल पाएगा: नमिता मारकोले, एसडीएम, बागबाहरा

4 महीने बाद होने वाली है बेटी की शादी

गांव वालों और परिवार वालों ने बताया कि मनबोध गाड़ा की बेटी की शादी चार महीने बाद होनी है. बेटी की शादी को लेकर परिवार के लोग पहले से परेशान हैं. उसी बीच इस तरह की घटना से पूरा परिवार सदमे में है. परिवार वालों ने बताया कि अप्रैल महीने में बेटी की शादी को लेकर पिता मनबोध अभी से तैयारियों में लगे थे. उनकी कोशिश थी कि धान बिकने पर मिलने वाले पैसों से बेटी की शादी का खर्चा उठाया जाएगा.

‘टोकन तुंहर हाथ’

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए शुरू किया गया एक मोबाइल ऐप है. इस एंड्रॉइड एप्लिकेशन को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विशेष रूप से किसानों की सुविधा के लिए विकसित किया गया है. इस ऐप का प्राथमिक उद्देश्य समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों के लिए टोकन जारी करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाना है. यह ऐप धान खरीदी केंद्रों पर होने वाली भीड़भाड़, अव्यवस्था और किसानों को होने वाली समस्याओं का एक सीधा डिजिटल समाधान है. ऐप का संचालन और प्रबंधन छत्तीसगढ़ खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से किया जाता है. यह विभाग राज्य में धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार है.

समर्थन मूल्य बढ़ा, खरीदी अवधि तय

कृषि विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी की दर 3100 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है. राज्य सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की सीमा निर्धारित की है. धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी. इस दौरान करीब 25 लाख किसान धान विक्रय कर सकेंगे.

ई-केवाईसी और डिजिटल पंजीयन अनिवार्य

धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इस बार ई-केवाईसी और भारत सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है. इससे किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और डुप्लीकेशन या फर्जी पंजीयन की संभावना समाप्त होगी.

किसानों को 7 दिन में भुगतान

सरकार ने किसानों के भुगतान को लेकर इस साल स्पष्ट नीति बनाई है. धान विक्रय के बाद किसानों को 6 से 7 दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है. वहीं जिन समितियों में खरीदी प्रक्रिया के दौरान शून्य सुखत (अनियमितता-मुक्त) स्थिति रहेगी, उन्हें 5 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

केंद्र सरकार को 73 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य

खाद्य विभाग, भारत सरकार ने खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को 73 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल में जमा करने का लक्ष्य दिया है. राज्य सरकार ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण व्यवस्था को चाक चौबंद किया है. अबतक ज्यादातर जिलों में तेजी से धान की खरीदी की जा रही है.