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अब क्या कटे हुए सिर भी जुड़ सकेंगे

मस्तिष्क प्रत्यारोपण की नई तकनीक पर सैद्धांतिक सफलता

  • ए आई और रोबोटिक्स की मदद लेंगे

  • कई लाइलाज बीमारियों की ईलाज होगा

  • नैतिक मुद्दे पर इस पर अभी बहस छिडी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में ब्रेन ब्रिज नामक एक पहल ने चिकित्सा और विज्ञान जगत में एक विस्फोटक दावा करके सनसनी फैला दी है। इस टीम ने दुनिया के पहले मानव सिर प्रत्यारोपण को संभव बनाने के लिए एक अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करने की घोषणा की है। यह दावा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही यह तंत्रिका विज्ञान, रोबोटिक्स और जीव विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने का संकेत देता है।

ब्रेन ब्रिज एक ऐसा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जो गंभीर बीमारियों, जैसे कि लाइलाज न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार या शरीर के निचले हिस्से के गंभीर ट्रॉमा से पीड़ित लोगों के लिए जीवन की एक नई आशा जगा सकता है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एक स्वस्थ, दान किए गए शरीर पर रोगी के सिर (जिसमें मस्तिष्क, चेतना और व्यक्तित्व शामिल है) का प्रत्यारोपण करना है।

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ब्रेन ब्रिज टीम का दावा है कि उन्होंने इस जटिल प्रक्रिया के लिए एक रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सिस्टम तैयार किया है। इस प्रणाली में निम्नलिखित मुख्य चरण शामिल होंगे। सिर और धड़ को अलग करने के लिए अत्यंत सटीकता के साथ रोबोटिक आर्म्स का उपयोग किया जाएगा, ताकि रीढ़ की हड्डी और प्रमुख रक्त वाहिकाओं को न्यूनतम क्षति पहुँचे।

चुनौती का सबसे बड़ा हिस्सा रीढ़ की हड्डी के कटे हुए सिरों को सफलतापूर्वक जोड़ना है। इसके लिए एक विशेष फ्यूजन एजेंट और ए आई निर्देशित माइक्रो-रोबोटिक्स का उपयोग करने का दावा किया गया है ताकि तंत्रिका कनेक्शन को फिर से स्थापित किया जा सके। ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क को जीवित रखने के लिए रोगी के शरीर को गहन हाइपोथर्मिया में रखा जाएगा, जिससे ऑक्सीजन की आवश्यकता कम हो जाती है। विशेष मशीनें मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बनाए रखेंगी।

हालांकि यह दावा वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक लगता है, लेकिन यह कई गंभीर नैतिक और तकनीकी चुनौतियाँ खड़ी करता है: चिकित्सा विज्ञान में रीढ़ की हड्डी के कटे हुए न्यूरॉन्स को पूरी तरह से फिर से जोड़ना आज भी एक अनसुलझी पहेली है। ब्रेन ब्रिज का दावा इस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता का संकेत देता है, जिसकी वैज्ञानिक समुदाय द्वारा पुष्टि होना बाकी है।

सिर को एक एलियन बॉडी (गैर-देशी शरीर) पर प्रत्यारोपित करने पर रोगी के इम्यून सिस्टम द्वारा सिर को अस्वीकार करने का खतरा बहुत अधिक होगा। इसके लिए अत्यंत शक्तिशाली इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं की आवश्यकता होगी। एक पूरी तरह से नए शरीर के साथ तालमेल बिठाने वाले रोगी पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव अप्रत्याशित और गंभीर हो सकते हैं।

चिकित्सा जगत के कई प्रमुख विशेषज्ञ इस परियोजना को अत्यंत विवादास्पद और फिलहाल अवास्तविक मान रहे हैं। सिर प्रत्यारोपण का विचार पहले भी सामने आ चुका है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं के कारण इसे कभी भी सफलतापूर्वक मानव पर निष्पादित नहीं किया गया है।

बहरहाल, ब्रेन ब्रिज का यह दावा कम से कम यह दर्शाता है कि उन्नत रोबोटिक्स और ए आई का उपयोग अब चिकित्सा की उन सीमाओं को छू रहा है जिनके बारे में पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आने वाले वर्षों में, वैज्ञानिक और नैतिक दोनों मोर्चों पर इस परियोजना पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

 

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