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गुजरात एटीएस द्वारा जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़

पाकिस्तान से संचालित हो रही थी सारी गतिविधियां

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक बड़े जासूसी और हनी-ट्रैप नेटवर्क का पर्दाफाश करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस नेटवर्क को कथित तौर पर सीमा पार की खुफिया एजेंसियों द्वारा संचालित किया जा रहा था, और इसका उद्देश्य भारतीय सेना से संवेदनशील जानकारी प्राप्त करना था।

एटीएस ने इस मामले में एक सेवारत सूबेदार रैंक के सैन्यकर्मी सहित एक महिला और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। जाँच के अनुसार, महिला आरोपी ने सूबेदार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से अनाम चैट ऐप्स, के माध्यम से फँसाया। यह महिला खुद को एक उच्च-प्रोफाइल सरकारी कर्मचारी या रक्षा विश्लेषक के रूप में प्रस्तुत करती थी।

एक बार जब सूबेदार को फँसा लिया गया, तो महिला और उसके सहयोगियों ने आपत्तिजनक निजी तस्वीरों और वीडियो का उपयोग करके उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। बदले में, सूबेदार को सैन्य ठिकाने, तैनाती, उपकरणों की आवाजाही और संचार प्रोटोकॉल से संबंधित अत्यंत गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया गया।

यह जानकारी हवाला चैनलों के माध्यम से भुगतान किए गए धन के बदले में दी जाती थी। एटीएस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सैन्य विशेषज्ञों ने इस घटना को एक गंभीर चेतावनी माना है, जो दिखाता है कि कैसे दुश्मन एजेंसियाँ साइबर स्पेस का उपयोग करके व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षाकर्मियों को लक्षित कर रही हैं। सेना ने अपने कर्मियों को सोशल मीडिया पर गोपनीयता और सतर्कता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, जबकि इस घटना के बाद, आंतरिक सुरक्षा ऑडिट भी शुरू कर दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अन्य कोई कर्मी इस प्रकार के जाल में न फँसें।