Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Fingernail Lunula Meaning: नाखूनों पर बने सफेद अर्धचंद्र से जानें अपना भविष्य और भाग्य प्रेगनेंसी में जरूरी पोषण: स्वस्थ मां और बेबी के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स केन्या का विलवणीकरण प्लांट का वन्यजीवन में सहयोग ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हादसा: CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, MCD अधिकारियों को मिली बड़ी राहत Lucknow-Kanpur Expressway: आम जनता के लिए खुला 6-लेन एक्सप्रेस-वे, 120 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी गाड़... Ghazipur Crime News: जेवर और पैसों के विवाद में दादी बनी कातिल, मासूम पोते की गला दबाकर हत्या महाकाल मंदिर: सावन और भादौ मास में बदली आरती दर्शन की व्यवस्था, अब और अधिक श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन सिंहस्थ 2028 की तैयारी: रेलवे पटरी पर हादसों को रोकने के लिए बिछाया जा रहा सुरक्षा घेरा मंदसौर हाईवे हादसा: टैंकर पलटने से फसलें जलकर राख, मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन Indore-Ratlam Fourlane Accident: बिलपांक टोल के पास कार डिवाइडर से टकराई, बाल चिकित्सक समेत दो की जा...

सात सौ कफ सिरप कंपनियों की ऑडिट

कई लोगों और बच्चों की मौत के अलावा विदेश से भी शिकायत

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की दुखद मौत का संवेदनशील मामला मंगलवार को राज्यसभा में उठा, जहाँ सांसदों ने इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पर सरकार से जवाब मांगा। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित प्रश्नों का जवाब देते हुए सदन को इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बच्चों की मौत के बाद, केंद्र सरकार की एक टीम ने छिंदवाड़ा और नागपुर जैसे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और जांच के लिए 19 दवा के नमूने एकत्र किए गए।

जांच में यह खुलासा हुआ कि इन नमूनों में से चार अमानक पाए गए। मंत्री ने पुष्टि की कि बच्चों ने जिस कफ सिरप का सेवन किया था, उसमें डाईएथिलिन ग्लाइकाल की मात्रा अत्यंत खतरनाक स्तर पर थी, जिसकी सांद्रता 46% डब्ल्यू-वी मापी गई थी। यह एक विषाक्त रसायन है जिसकी मौजूदगी सीधे तौर पर बच्चों की मौत का कारण बनी। इसके तत्काल बाद, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पुदुचेरी सहित संबंधित राज्यों में इन दवाओं के वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इस त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने राज्य प्राधिकरणों के माध्यम से एक व्यापक ऑडिट अभियान चलाया है। पटेल ने बताया कि देश भर की 700 से अधिक खांसी सिरप निर्माता कंपनियों का सघन ऑडिट कराया गया है। इसके अलावा, दवा सुरक्षा मानकों को सख्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है: अब दवा पैकेजिंग पर क्यूआर कोड देना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम दवाओं की ट्रेसबिलिटी (पता लगाने की क्षमता) को बढ़ाएगा और नकली या अमानक दवाओं के बाजार में प्रवेश को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री के जवाब में पिछले कुछ वर्षों में दवा नमूनों की जांच का ब्यौरा देते हुए एक चिंताजनक आंकड़ा भी सामने आया। उन्होंने बताया कि हर साल औसतन 3000 दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में असफल (फेल) हो रहे हैं, जो देश की दवा निर्माण और नियामक प्रणाली में मौजूद बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है। यह संख्या गुणवत्ता नियंत्रण और विनियामक निरीक्षण को तत्काल मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देती है ताकि जनता, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।