लाल किला विस्फोट के जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली में हुए आत्मघाती विस्फोट और फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने की घटना के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और यूपी एटीएस की जाँच का केंद्र अब उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर पर आ गया है। जाँच एजेंसियों को कानपुर की घनी आबादी वाले इलाकों में सक्रिय तीन स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों के बैंक खातों में आतंकी फंडिंग का एक बड़ा जाल मिला है।
इन एनजीओ के खातों में विदेश से हुए भारी-भरकम और संदिग्ध लेन-देन ने एक व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल की मौजूदगी की पुष्टि की है, जिसके तार दिल्ली विस्फोट की मास्टरमाइंड डॉ. शाहीन सईद और उसके सहयोगी डॉ. आरिफ मीर के नेटवर्क से सीधे जुड़े हैं। खातों में खाड़ी देशों सहित अन्य विदेशी स्रोतों से करोड़ों रुपये की रकम ट्रांसफर की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि इस धन का उपयोग स्लीपर सेल तैयार करने और स्थानीय स्तर पर घातक ऑपरेशनों की तैयारी के लिए किया जा रहा था।
इस खुलासे के तुरंत बाद, कानपुर के संवेदनशील क्षेत्रों से 132 संदिग्ध लोग रातोंरात अपने घरों को ताला लगाकर गायब हो गए हैं। यह सामूहिक पलायन जांच एजेंसियों की चुनौतियों को और बढ़ा रहा है। फंडिंग की पड़ताल के दौरान यह भी पता चला कि एनजीओ खातों से एक बड़ी राशि स्थानीय युवतियों के खातों में स्थानांतरित की गई थी, जिन्हें यह कहकर गुमराह किया गया था कि यह पैसा विदेश में रहने वाले जरूरतमंदों की मदद के लिए भेजा जा रहा है, जबकि उनके एटीएम और चेकबुक एनजीओ संचालकों के पास रहते थे।
एजेंसियों को संदेह है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग या युवतियों को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल करने की एक सोची-समझी साजिश थी। एटीएस ने अब इन सभी 132 संदिग्धों की तलाश में पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।